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वाह री सरकार, पैसे के लिए अधिकारियों को बना दिया क्लर्क!
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jul 2013 01:14 AM IST
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निजी कंपनियों की इस तरह की हरकत तो समझ में आती है लेकिन जब केंद्र सरकार ही पैसा बचाने के लिए अधिकारियों को क्लर्क बना दे तो इसे क्या कहा जाएगा।
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केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों पर अमल से बचने के लिए यही कारनामा किया है।
मंत्रालय ने भारतीय सूचना सेवा ग्रुप बी के अधिकारियों को क्लर्क बना दिया। मामला केंद्रीय पंचाट पहुंचने पर सरकार की हरकत का खुलासा हुआ।
केंद्रीय प्रशासनिक ट्राइब्यूनल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि इन अधिकारियों का सम्मान लौटाने का मामला पीएमओ में ले जाएं और जल्द से जल्द उस पर अमल कराएं। यह अवधि तीन महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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सरकारी तंत्र के प्रचार-प्रसार में लगे अधिकारियों को उनका ही मंत्रालय प्रताड़ित कर रहा है। छठे वेतन आयोग में मंत्रालय की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव में इन अधिकारियों को क्लर्क बताया गया है। यह पहला उदाहरण है जब किसी सेवा को प्रमोट करने के बजाए नीचे धकेला गया है।
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छठे वेतन आयोग ने गजट रैंक के अधिकारियों को 4800 रुपये के ग्रेड पे दिया था और चार साल की सेवा के बाद 5400 रुपये ग्रेड पे देने की सिफारिश की थी लेकिन सूचना सेवा के अधिकारियों के केस में उन्हें 4200 का ग्रेड पे दिया जो क्लर्क का ग्रेड पे है।
मंत्रालय की इस कारगुजारी पर जब अधिकारियों ने हल्ला मचाया तो उनका ग्रेड 4600 रुपये कर दिया गया। लेकिन उन्हें 4800 रुपये ग्रेड पे नहीं दिया गया। इन अधिकारियों ने अपने मंत्रालय से लेकर वित्त मंत्रालय, कार्मिक मंत्रालय और पीएमओ में कई ज्ञापन दिए पर कहीं भी न्याय नहीं मिला।
आखिरकार अधिकारियों ने पंचाट की शरण ली। पंचाट की हैदराबाद बेंच ने अब इस मामले की सुनवाई के बाद अधिकारियों की मांग को जायज करार दिया है।
पंचाट ने माना कि अधिकारियों को 4800 रुपये का ग्रेड पे और चार साल बाद 5400 रुपये ग्रेड पे मिलना चाहिए। चूंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बीच विवाद चल रहा है। इसलिए पंचाट ने इस मामले को पीएमओ भेजने का निर्देश दिया है। साथ ही यह कहा है कि इस मामले तीन महीने के अंदर ही अमल किया जाए।