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मोदी सरकार के इस 'ड्रीम' प्रोजेक्ट पर दिसंबर से शुरू होगा काम

Mon, 15 Jun 2015 02:18 PM IST
Updated Mon, 15 Jun 2015 02:18 PM IST
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Government  launch river-linking project in December.

करीब 40 साल बाद भारत अपने सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट को शुरू करने की योजना बना रही है। नदियों को जोड़ने की इस अहम योजना की शुरूआत दिसंबर में शुरू होगी।

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केन-बेतवा नदियों को जोड़ने के 30 प्रोजेक्ट की शुरूआत होगी। इसके जरिए मध्य प्रदेश के रायसेन और विदिशा जिलों में पानी की कमी को पूरा करने और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग मिलेगा। दोनों नदियों को फेज-1 और फेज-2 प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में चलाया जाएगा।
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हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इसमें करीब 7600 करोड़ से ज्यादा के खर्च का अनुमान है। केन-बेतवा लिंक देश के 4.46 लाख हेक्टेयर की वार्षिक सिंचाई की सुविधा प्रदान करेगा। इसका आकार दिल्ली का तीन गुना है।

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मोदी सरकार ने तेज की तैयारी

Government  launch river-linking project in December.

इस मामले में राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी के निदेशक (एमडब्ल्यूडीए) एस मसूद हुसैन ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट और दूसरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। हम इस पर दिसंबर से काम शुरू करेंगे। दूसरे कई प्रोजक्ट की पूरी जानकारी जल्द आ जाएगी और इसके साथ ही इससे जुड़े निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू हो जाएंगे। ये एजेंसी जल संसाधन मंत्रालय के तहत कार्य करेगी।

फिलहाल गुजरात और महाराष्ट्र के दमनगंगा-पिंजल और पारतापी-नर्मदा लिंक पर निर्माण कार्य चल रहा है। इसके बाद दूसरे फेज में केन-बेतवा लिंक की शुरूआत जल्द होगी। इसको लेकर पूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

इस प्रोजेक्ट को वाजपेयी सरकार ने प्राथमिकता से लिया था। जिसे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसीलिए एक विशेष कमेटी का गठन पिछले सितंबर में सरकार की ओर से किया गया। इसके साथ-साथ अप्रैल में अलग से एक टास्क फोर्स का गठन किया गया।

एमडब्ल्यूडीए एस मसूद हुसैन के मुताबिक ये प्रोजेक्ट देश की पानी की सुरक्षा के साथ पर्यावरण को लेकर उठाए जा रहे सवालों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

40 साल से अटका है मामला

Government  launch river-linking project in December.

बांधों, नदियों और लोगों पर दक्षिण एशिया नेटवर्क से जुड़े हिमांशु ठक्कर का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट से वनों की कटाई, लोगों का विस्थापन जैसे मामले बढ़ेंगे जिसका असर जलवायु परिवर्तन पर क्या नहीं होगा?

उन्होंने कहा कि सरकार को इससे बेहतर होगा कि वह जल संचयन और जल प्रबंधन जैसे प्रभावी विकल्प पर विचार करना चाहिए। हालांकि हुसैन ने ठक्कर की बातों को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि रिपोर्ट में हमने सभी प्रभावों पर गौर किया है। जिससे इसका फायदा सभी को मिल सके।

इस प्रोजेक्ट के जरिए 34 हजार मेगावाट बिजली पैदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके जरिए 175 मिलियन हेक्टेयर भूमि के लिए 140 लाख हेक्टेयर से ज्यादा सिंचाई की क्षमता बढ़ाया जा सके।

करीब 10 साल पहले पूरे प्रोजेक्ट पर 5.6 लाख करोड़ का खर्च आने का अनुमान था लेकिन अधिकारियों के मुताबिक इसके बढ़ने की उम्मीद है। इस पर आखिरी खर्च सभी 30 लिंक के पूरे होने के बाद ही साफ हो पाएगा।

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