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सरकार को पता है वीके सिंह के दावों की सच्चाई

Thu, 26 Sep 2013 12:02 AM IST
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
गुंजन कुमार/नई दिल्ली Updated Thu, 26 Sep 2013 12:02 AM IST
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government know general vk singh truth

जम्मू और कश्मीर के कुछ मंत्रियों को पैसे देने के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के दावों की सच्चाई केंद्र सरकार को मालूम है।

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लिहाजा इसके लिए सरकार को जम्मू-कश्मीर के पैसे पाने वाले मंत्रियों के नाम जानने की जरूरत नहीं और न ही इसके लिए सीबीआई जांच की आवश्यकता है।

यह मानना है पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और रक्षा मंत्रालय के खरीद विभाग में सचिव रह चुके आरके सिंह का।

सिंह के मुताबिक देश की विभिन्न खुफिया एजेंसियों और यूनिटों के खर्च के लिए सरकार की सीक्रेट फंडिंग का पूरा ब्यौरा संबंधित मंत्रालय के सचिव के पास होता है।
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सीक्रेट फंड के गलत इस्तेमाल की जांच के लिए सरकार की अपनी ठोस अंदरूनी व्यवस्था भी है।

लिहाजा जनरल (रिटायर) सिंह सही बोल रहे हैं या गलत रक्षा मंत्रालय इसका पता बिना किसी दिक्कत के लगा सकता है।

सेना की खुफिया टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन (टीएसडी) के फंड के गलत इस्तेमाल पर वीके सिंह पर लगे आरोपों के मसले पर आरके सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि इसकी जांच के लिए सरकार के पास अपनी अंदरूनी व्यवस्था है।
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इस व्यवस्था के तहत रक्षा मंत्रालय को जरूर मालूम होगा कि जनरल सिंह गलत बोल रहे हैं या सही। किसी भी सीक्रेट फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर पर्दा तभी पड़ा रह सकता है जब सचिव इस ओर से अपनी आंखें मूंद ले।


पूर्व गृह सचिव के मुताबिक सीक्रेट फंडिंग का विषय काफी जटिल है। यह बातें सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। लिहाजा इन मामलों को लीक करने वालों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

कश्मीर में शांति और स्थायित्व कायम रखने के लिए वहां के कुछ मंत्रियों को पैसे देने के वीके सिंह के दावों से मची खलबली के सवाल पर उन्होंने कहा कि रक्षा और गृह दो ही ऐसे मंत्रालय हैं जो खुफिया कामों के लिए सीक्रेट फंडिंग का इस्तेमाल करते हैं।

इसकी मंजूरी के कागजात पर दोनों मंत्रालयों के सचिव का हस्ताक्षर भी होता है। इतना ही नहीं इसका ब्यौरा भी उनके पास आता है।

अगर फंडिंग का गलत इस्तेमाल हुआ है तो सचिव उसी वक्त सवाल खड़े कर सकते हैं।

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