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ज्यूपिटर-6 के मुद्दे पर केंद्र सरकार जिम्मेदार नहीं
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Oct 2012 10:48 PM IST
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विदेशी जहाज ‘ज्यूपिटर-6’ के रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने और चालक दल के दस भारतीय सदस्यों की मृत्यु के मामले में सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि किसी भी तरह के दायित्व के लिए केंद्र सरकार और जहाजरानी विभाग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ ने जहाज के मालिकों और बीमाकर्ता की ओर से निर्धारित मुआवजे की राशि बढ़ाने से भी इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मुआवजे की राशि में बढ़ोत्तरी के लिए उचित फोरम का दरवाजा खटखटाने के मृतक चालक दल के सदस्यों के परिजनों के प्रयासों को प्रभावित नहीं करेगा।
याद रहे कि ज्यूपिटर-6 जहाज नामीबिया की वाल्विस खाड़ी से भारत में गुजरात के अलंग के लिए 21 अगस्त, 2005 को रवाना हुआ था। इस जहाज के चालक दल के सदस्यों में दस भारतीय और यूक्रेन के तीन नागरिक शामिल थे। यह जहाज एक अन्य निष्क्रिय हो चुके जहाज को खींच रहा था। मगर अचानक ही यह लापता हो गया।
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जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि जहाज का इस तरह गायब होना एक पहेली है। इस हादसे के संदर्भ में जहाज मालिकों ने अधिकारी स्तर के प्रत्येक मृत सदस्य के लिए 40 हजार अमेरिकी डॉलर और गैर अधिकारी स्तर के प्रत्येक मृत सदस्य के लिए 25 हजार अमेरिकी डॉलर का मुआवजा दिया था।
परिवार के सदस्य को खोने और मुआवजे की राशि को लेकर मृत चालक दल के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वह चाहते थे कि उनकी जिंदगी की रक्षा करने में असफल रहने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ कार्रवाई हो और सारे मामले की सही तरीके से जांच हो तथा मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए।
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जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ ने जहाज के मालिकों और बीमाकर्ता की ओर से निर्धारित मुआवजे की राशि बढ़ाने से भी इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मुआवजे की राशि में बढ़ोत्तरी के लिए उचित फोरम का दरवाजा खटखटाने के मृतक चालक दल के सदस्यों के परिजनों के प्रयासों को प्रभावित नहीं करेगा।
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याद रहे कि ज्यूपिटर-6 जहाज नामीबिया की वाल्विस खाड़ी से भारत में गुजरात के अलंग के लिए 21 अगस्त, 2005 को रवाना हुआ था। इस जहाज के चालक दल के सदस्यों में दस भारतीय और यूक्रेन के तीन नागरिक शामिल थे। यह जहाज एक अन्य निष्क्रिय हो चुके जहाज को खींच रहा था। मगर अचानक ही यह लापता हो गया।
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जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि जहाज का इस तरह गायब होना एक पहेली है। इस हादसे के संदर्भ में जहाज मालिकों ने अधिकारी स्तर के प्रत्येक मृत सदस्य के लिए 40 हजार अमेरिकी डॉलर और गैर अधिकारी स्तर के प्रत्येक मृत सदस्य के लिए 25 हजार अमेरिकी डॉलर का मुआवजा दिया था।
परिवार के सदस्य को खोने और मुआवजे की राशि को लेकर मृत चालक दल के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वह चाहते थे कि उनकी जिंदगी की रक्षा करने में असफल रहने के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ कार्रवाई हो और सारे मामले की सही तरीके से जांच हो तथा मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए।