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आरक्षण: सरकार को नहीं मालूम कितनों को मिला लाभ

Wed, 19 Dec 2012 08:49 AM IST
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली Updated Wed, 19 Dec 2012 08:49 AM IST
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government has no records about beneficiaries of reservation

प्रमोशन में आरक्षण देकर सहयोगी दलों के दबाव से मुक्त हो चुकी केंद्र सरकार शायद इस पर गंभीर नहीं कि जातिगत आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंद को मिल रहा है या नहीं। यही वजह है कि सरकार को यह तक नहीं पता कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कितने लोग अब तक आरक्षण से लाभान्वित हुए हैं। स्पष्ट आंकड़ा तो दूर केंद्र ने इस बारे में अनुमानित आंकड़ा देने के सवाल को भी टाल दिया है।

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सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में मांगी गई सूचना के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने ना-नुकुर करने की बजाय बड़ी चतुराई से काम लिया। मंत्रालय ने फरवरी में कहा कि जल्द इस संबंध में सूचना तैयार कर उपलब्ध करायी जाएगी। नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता व पेशे से अध्यापक डॉ. राजीव गुप्ता ने इसके बाद कई कोशिशें की। लेकिन कोई जवाब उन्हें नहीं मिला।
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उन्होंने गतवर्ष दिसंबर में मंत्रालय से यह सूचना मांगी थी, जिसमें उन्होंने पूछा था कि संविधान के अनुच्छेद 15(4) व 16(4) के तहत अब तक कितने अनुसूचित जाति व जनजाति का पिछड़ापन व असमानता को दूर किया जा चुका है। इस मुख्य सवाल के साथ उन्होंने आरटीआई के जरिए तीन सूचनाएं मंत्रालय से मांगी थीं।
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डॉ. गुप्ता ने यह भी पूछा था कि जब क्रीमी लेयर की श्रेणी में होने के बावजूद एससी/एसटी को आरक्षण के दायरे से बाहर नहीं किया जाता तो फिर ओबीसी को इस लाभ से क्यों वंचित किया जाता है। हालांकि मंत्रालय ने कोई स्पष्ट जवाब देने के बजाय यह कह दिया कि इस संबंध में सूचना तैयार की जा रही है। जबकि आरटीआई के जवाब में स्पष्ट सूचना दिया जाना अनिवार्य है।


डॉ. गुप्ता ने इस संबंध में जवाब न मिलने के खिलाफ अप्रैल में अपील की थी जिसके जवाब के इंतजार में वह आज तक हैं और अब वह केंद्रीय सूचना आयोग में अपील दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। खासबात यह है कि डॉ. गुप्ता ने आरटीआई में एक ऐसा मुद्दा भी उठाया है जो आरक्षण लागू किए जाने के बाद प्रत्येक दस वर्ष में उसकी समीक्षा के संबंध में सरकार की निष्क्रियता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने यह भी पूछा था कि कब तक आरक्षण से सभी वर्गों को पिछड़ेपन से पूरी तरह उबारकर समानता के अधिकार को समान्य रूप में लाया जाएगा।

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