जम्मू-कश्मीर: सरकार के लिए बन रहे ये फॉर्मूले
जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के नतीजे खंडित जनादेश के रूप में सामने आए हैं और सरकार के गठन पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना के बीच सबकी निगाहें दिल्ली में मोदी-शाह की जोड़ी और कश्मीर घाटी में मुफ्ती परिवार पर हैं।
जम्मू कश्मीर भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है और बहुमत पाने के मिशन में नाकाम रही भाजपा राज्य में अस्थिरता के हालात पैदा करने का जोखिम नहीं उठा सकती।
नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा ने जम्मू में बेहतर प्रदर्शन किया है जबकि पीडीपी घाटी में अपनी ताकत दिखाने में कामयाब रही। दोनों दलों को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा।
राज्य में भाजपा सरकार बनाने में क्या भूमिका निभाएगी इसका आखिरी फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को लेना है। वहीं मुफ्ती परिवार भी तमाम विकल्पों पर गौर करते हुए स्थितियों को भांपने की नीति अपना रहा है।
बड़ा सवाल आखिर कौन बनाएगा सरकार?
सरकार बनाने के लिए कई समीकरण सामने आ रहे हैं। जिसमें सबसे उपयुक्त समीकरण पीडीपी और कांग्रेस के साथ आने के तौर पर देखा जा रहा है।
इस समीकरण में निर्दलीय विधायकों के सहयोग से गंठबंधन का आंकड़ा 47 तक पहुंच सकता है और सरकार बनाई जा सकती है। लेकिन इस गठबंधन के अस्थिर रहने की संभावना ज्यादा है।
एक समीकरण यह भी है कि भाजपा एनडीए के पुराने सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस के साथ हाथ मिला ले। लेकिन ऐसा होने से सबसे ज्यादा नुकसान राज्य में सत्ता से बाहर हुई नेशनल कांफ्रेंस को हो सकता है।
इन हालातों के बीच एक ही विकल्प नजर आता है और वह यह कि पीडीपी और भाजपा स्थिर सरकार बनाने के लिए हाथ मिलाएं। वैचारिक मतभेद के बावजूद भाजपा-पीडीपी गठबंधन करते हैं तो इनके पास 53 सीटें होंगी जो राज्य में स्थिर सरकार के लिए एक विकल्प हो सकता है।
लेकिन हाथ मिलाने से पहने पीडीपी और भाजपा को अपने पार्टी एजेंडा को छोड़कर जनादेश का सम्मान करते हुए न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर सहमति बनानी होगी।