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जम्मू-कश्मीर में सरकार के गठन में अभी और देर

Fri, 29 Jan 2016 06:18 AM IST
Updated Fri, 29 Jan 2016 06:18 AM IST
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government formation in jammu and kashmir

जम्मू-कश्मीर में नई सरकार बनाने को लेकर भाजपा और पीडीपी के बीच मतभेद अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाए। राज्य मेें सरकार के गठन में अभी और देर संभव है, हालांकि सब कुछ लगभग तय है फिर भी गतिरोध कायम है। भाजपा को पीडीपी की पहल का इंतजार है जबकि पीडीपी अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए ठोस आधार चाहती है।

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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहतीं जिससे सत्तालोलुपता का कोई संदेश आम लोगों के पास जाए। लिहाजा वह सुलझी नेत्री की तरह बारी-बारी से एक-एक कदम उठाना चाहती हैं। यह धैर्यशीलता उन्हें अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद से विरासत में मिली है।
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पीडीपी सूत्रों का कहना है कि महबूबा ने केंद्र सरकार के दो दूतों को बता दिया है कि उनका वोट बैंक गठबंधन एजेंडे की अनदेखी से नाराज है। वह अपने पिता मुफ्ती मोहम्मद के फैसले को बदलना नहीं चाहतीं लेकिन इसके लिए केंद्र की ओर से कोई ठोस आधार मुहैया कराया जाना जरूरी है।
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पीडीपी की ओर से भाजपा के साथ गठबंधन बनाए रखने का संकेत दिया जा चुका है और सरकार गठन के लिए फैसला महबूबा पर छोड़ा गया है। दो दिन बाद श्रीनगर में होने वाली पीडीपी की बैठक के बाद आम कार्यकर्ताओं से सलाह मशविरा का दौर शुरू हो सकता है। श्रीनगर के बाद ऐसी एक बैठक जम्मू में 3 फरवरी को प्रस्तावित है।

कुछ मुद्दों पर उलझन में है केंद्र

government formation in jammu and kashmir

एक मार्च, 2015 को शपथ ग्रहण से पहले महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद ने गठबंधन एजेंडा तय करने में लगभग दो महीने लगाए थे। इस एजेंडे को आधार बनाकर मुफ्ती ने विपरीत ध्रुव के सियासी दल भाजपा से गठबंधन का औचित्य तलाशा था।

पीडीपी की दिक्कत यह है कि उसके पास उपलब्धियों को गिनाने के नाम पर कुछ खास नहीं है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान जरूर किया है लेकिन बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास का मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है। पीड़ितों के खाते में राहत के पैसे नहीं आ सके।

केंद्र की अपनी मजबूरियां हैं। नतीजतन एनएचपीसी को दो प्रोजेक्टों की वापसी के वादे से केंद्र सरकार कन्नी काट चुकी है। अफस्पा की आंशिक वापसी का जोखिम केंद्र सरकार उठा नहीं सकती। सेना और सुरक्षा बलों द्वारा भवनों और जमीन को तुरंत खाली करना संभव नहीं है। इसलिए इन मुद्दों पर केंद्र खुलकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दे सकता।

पेच इन्हीं मुद्दों पर फंसा है। श्रीनगर को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा होती है तो जम्मू में आंदोलन खड़ा हो सकता है। इस तरह पीडीपी और भाजपा दोनों अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने की जुगत निकालने की कोशिश में हैं। ऐसे में जनादेश का सम्मान और दिलों को जोड़ने जैसी बातें सरकार के गठ का फिर से आधार बन सकती हैं।

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