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कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला!

Sat, 12 Jul 2014 12:42 PM IST
शकील अख्तर/बीबीसी उर्दू संवाददाता
शकील अख्तर/बीबीसी उर्दू संवाददाता Updated Sat, 12 Jul 2014 12:42 PM IST
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government asks to un officials to vacate banglow of delhi

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार कश्मीर से संयुक्त राष्ट्र को बेदखल कर रही है? बहुत से प्रेक्षकों का मानना है कि सरकार ने यह प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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भारत सरकार ने दिल्ली स्थित कश्मीर से जुडे संयुक्त राष्ट्र के मिशन से कहा है कि वह उस सरकारी बंगले को खाली करे, जिसमें उसका दफ्तर है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने एक पत्रकार वार्ता में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, "हमारा यह मानना है कि संयुक्त राष्ट्र का यह मिशन अप्रासंगिक हो चुका है। मैं इस बात की पुष्टि करता हूं कि सरकार ने संयुक्त राष्ट्र से वह सरकारी बंगला खाली करने को कहा है, जो सरकार ने उन्हें निशुल्क दिया था।"
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सुरक्षा मामलों के प्रेक्षकों का विचार है कि कश्मीर मामले में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य प्रेक्षकों की भूमिका पहले ही काफी सिमट चुकी थी।

सरकार का अहम फैसला

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विवेकानंद फाउंडेशन के सुशांत सरीन के अनुसार मिशन का दफ्तर खाली करने का फैसला काफी अहम है।

वह कहते हैं, "यह निर्णय गलती से नहीं आया है। यह नई सरकार का फैसला है, जो एक सख्त संदेश देना चाहती है कि कश्मीर का मुद्दा कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है।"

संयुक्त राष्ट्र के सैन्य मिशन का दफ्तर 1949 से ही भारत में है। दिल्ली के अलावा मिशन का दफ्तर जम्मू-कश्मीर में भी है। वरिष्ठ प्रेक्षक अनिल आनंद कहते है कि दिल्ली के बाद कश्मीर के दफ्तर भी खाली कराए जा सकते हैं।

वह कहते हैं, "इसका सबसे ज्यादा प्रभाव अलगाववादियों पर पडे़गा क्योंकि वह हर छोटे-बडे मामले पर सैन्य प्रेक्षकों को ज्ञापन दिया करते थे।"

अलगाववादियों से नहीं मिली कोई प्रतिक्रिया

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भारत सरकार के इस फैसले पर अलगाववादियों की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन भारत प्रशासित कश्मीर की टीकाकार प्रोफेसर हमीदा नईम ने बंगला खाली कराने को एक खतरनाक कदम बताया है।

वह कहती हैं, "संयुक्त राष्ट्र के इस मिशन का यहां होना ही इस बात का प्रतीक है कि कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है। अगर यह मिशन बंद हो गया, तो कश्मीर के विवाद को खत्म बताया जाएगा। अलगाववादियों और पाकिस्तान को इस पर कडा विरोध जताना चाहिए।"

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी खामोशी से दिल्ली के सरकारी बंगले में अपना सामान समेट रहे हैं। अभी यह पता नहीं है कि वे कब तक यह बंगला खाली करेंगे।

क्या संयुक्त राष्ट्र अपना यह मिशन सदा के लिए बंद कर देगा? अभी इस बारे में कुछ नहीं मालूम।

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