फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   government aod opposition eyes on sp and bsp

सपा-बसपा पर अब पक्ष-विपक्ष की नजर

Wed, 21 Nov 2012 12:56 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 21 Nov 2012 12:56 AM IST
विज्ञापन
government aod opposition eyes on sp and bsp

खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मसले पर सामने खड़ी चुनौती से पार पाने के लिए अब सरकार को सपा और बसपा का ही सहारा है। विपक्षी दल भी एफडीआई के मुद्दे पर सरकार को परास्त करने के लिए सपा और बसपा की ओर देख रहे हैं।

विज्ञापन


साफ है कि रिटेल में एफडीआई का सवाल हो या अविश्वास प्रस्ताव की बात संसद के शीतकालीन सत्र की सियासी चाबी पूरी तरह सपा और बसपा के हाथ है। विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव की बजाय खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश पर वोटिंग करवाने के मुद्दे को तूल देकर सपा और बसपा को साथ लेने की फिराक में है तो सरकार के मैनेजर किसी भी सूरत में दोनों पार्टियों को अपने हाथ से जाने देने के लिए तैयार नहीं है।
विज्ञापन


सपा और बसपा को साधने की कोशिश मंगलवार को एनडीए की ओर से की गई। एनडीए संयोजक  और जद-यू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि एफडीआई पर सभी दलों के साथ बात काफी हद तक आगे बढ़ गई है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके साथ सपा और बसपा भी है तो उन्होंने इस मसले पर कुछ साफ नहीं किया। मगर यह जरूर कहा कि समय आने पर वह इसका खुलासा जरूर करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


भाजपा और माकपा को इस बात का अहसास है कि यूपीए सरकार का सपा और बसपा जितना भी सहयोग दें, मगर खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश का विरोध करना दोनों दलों की राजनीतिक मजबूरी है। इसीलिए यूपीए सरकार के खिलाफ विरोध की मुहिम को एफडीआई पर केंद्रित करने की कोशिश है।

माकपा सूत्रों के मुताबिक अगर यूपीए सरकार को गिराने पर जोर लगाया जाता है तो इससे सपा और बसपा समेत कई दल विपक्ष से अलग हो सकते हैं और इसका फायदा सरकार को हो सकता है। इसीलिए विदेशी निवेश के मसले पर वोटिंग के दांव से विपक्ष की एकता को एकजुट रखा जा सकता है। माकपा के एक नेता ने कहा कि मुलायम सिंह वामपंथी दलों के साथ बाकायदा जंतर-मंतर पर विरोध के लिए उतरे थे।


उधर, सरकार ने सपा और बसपा को एकजुट रखने के लिए पर्दे के पीछे से संवाद कायम करने की कोशिश की है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने मुलायम सिंह यादव से फोन पर बात की है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed