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साध्वी मामला: क्या सत्तापक्ष के आगे झुक जाएगा विपक्ष?

Sun, 07 Dec 2014 12:50 PM IST
Updated Sun, 07 Dec 2014 12:50 PM IST
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government and opposition plan in Sadhvi issue.

साध्वी निरंजन ज्योति के विवादित बोल के मुद्दे पर संसद में बेहद आक्रामक हो गईं विपक्षी पार्टियां भी अब इस मुद्दे पर सुलह का रास्ता खोज रही है। राज्यसभा में विपक्ष ने लगातार चार दिन सदन की कार्यवाही चलने नहीं दी है।

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कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, माकपा समेत नौ विपक्षी पार्टियों को संकेत मिल रहे है कि राज्यसभा में सदन के नेता अरूण जेटली सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सुबह दस बजे सभी पार्टियों की बैठक बुलाकर सुलह का फार्मूला पेश कर सकते हैं।
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वैसे विपक्षी पार्टियां भले ही सुलह का रास्ता तलाश रही हो, लेकिन अगर सरकार ने उनको कोई ठोस रास्ता नहीं दिया तो हंगामा अगले हफ्ते भी जारी रह सकता है। विपक्षी पार्टियां सदन में निंदा प्रस्ताव पारित कराना चाहती है।
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विपक्ष को सरकार के सुलह फार्मूले का इंतजार

government and opposition plan in Sadhvi issue.

सूत्रों ने बताया कि इस प्रस्ताव की भाषा को नरम करने की आजादी विपक्षी पार्टियां सरकार को दे सकते हैं। साथ ही प्रस्ताव में प्रधानमंत्री की ओर से ऐसी भाषा का इस्तेमाल किसी को नहीं करने की नसीहत को भी डाला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने सदन में कहा था कि किसी को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

दरअसल, विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को जो प्रस्ताव पेश किया है। उसकी भाषा बेहद कड़ी थी और उसमें सरकार और केंद्रीय राज्य मंत्री निरंजन कृष्णा के खिलाफ कड़े शब्द लिखे गए थे। इसीलिए सरकार को ऐतराज था।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि अगर सरकार की ओर से उनको नहीं बुलाया जाता तो सभी नौ पार्टियां खुद बैठकर कर आगे की रणनीति बनाएगी। नेता ने संकेत दिए कि प्रस्ताव की भाषा पर नरमी बरती जा सकती है लेकिन इस मांग से पीछे हटने को लेकर कोई राजी नहीं है।

वहीं सपा के एक नेता ने कहा कि साध्वी को बर्खास्त करने की मांग वैध नहीं थी, क्योंकि यह मामला मंत्री के पद के दुरुपयोग का मामला नहीं था। बर्खास्तगी की मांग पर अड़ा नहीं जा सकता था। इसीलिए प्रस्ताव का फार्मूला निकाला गया। माना जा रहा है कि विपक्ष के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री की ओर से कही बात को शामिल करने के बाद गतिरोध टूट सकता है।

निंदा प्रस्ताव के पक्ष में नहीं सरकार

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साध्वी निरंजना ज्योति के मामले में सरकार अब और झुकने के मूड में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बावजूद विपक्ष के अड़ियल रवैये से आहत सरकार के रणनीतिकारों ने तय किया है कि वे अब विपक्ष को झुकाएंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह निदां प्रस्ताव नहीं लाएगी। संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि पीएम के बयान के बाद निंदा प्रस्ताव की जरूरत नहीं है।

सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी ने वाम दलों के बहकावे में आकर उसे ठगा है। सरकार अब विपक्ष के चेहरा बचाने की कवायद में फंसने के बजाए उससे दो-दो हाथ करने की तैयारी में है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के पल्टी से पीएम मोदी भी आहत हैं। सरकार ने भी इसका अंदेशा लगा लिया है कि कांग्रेस पार्टी साध्वी के आड़ में उसके स्वपनिल विधेयकों की राह में रोड़ा अड़ा रही है।

सूत्र बताते हैं कि विपक्ष के साथ सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरूण जेटली बातचित की कमान संभाले हुए हैं। लेकिन उन्हें सरकार ने झुकने की मनाही की है। सरकार को भी लगने लगा है कि यह मामला अब लंबा खिंचेगा। सरकार ने साध्वी के विवादित बयान पर कानूनी पहलुओं को भी दिखवाया है।

जिससे यह बात उभरी है कि साध्वी पर कोई बड़ा कानूनी मामला नहीं बनता है। जिसके बाद से भाजपा आलाकमान ने साध्वी के मामले को लेकर सियासी लाभ उठाने का मन बना लिया है। उसने तय किया है कि साध्वी की ओर से भी अब कोई माफी नहीं होगी।

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