खुशखबरी, अब खुद से करिए अपने डॉक्यूमेंट्स अटेस्ट
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केंद्र सरकार की ओर से आम जनता के लिए एक राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने तय किया है कि अब सरकारी कामकाज में जमा कराए जाने वाले कोई भी कागजात किसी गैजटेड अधिकारी या फिर नोटरी से अटेस्ट कराने की जरूरत नहीं होगी।
इसकी जगह सरकार लोगों के खुद से अटेस्ट कागजात को भी स्वीकार करेगी। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के एक अधिकारी ने इस बारे में बताया कि इस मामले में केंद्र ने राज्यों से भी बात की है।
जिसमें केंद्र ने राज्यों से कहा है कि कई तरह के प्रार्थना पत्रों के साथ ऐफिडेविट मांगे जाते हैं। जिसमें खुद से अटेस्ट किए गए कागजात को भी स्वीकार करने पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
एफिडेविट बनवाने की प्रक्रिया होगी आसान
अधिकारी ने बताया कि वर्तमान समय में एक एफिडेविट बनवाने की प्रक्रिया काफी पेचीदा है। लोगों को इसे हासिल करने के लिए 100 रुपये से लेकर 500 सौ रुपये तक अधिकारियों या फिर नोटरी की देने पड़ते हैं।
वहीं कई अधिकारी ऐसे हैं जो पूरे कागजात नहीं होने पर एफिडेविट अटेस्ट भी नहीं करते हैं। इसके चलते लोगों को खासी परेशानी होती है। इनका सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण और सुदूर इलाके के लोग बनते हैं।
दूसरे एडमेनेस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमिशन की ओर से दी गई 12 वीं रिपोर्ट 'सिटिजन सेंट्रिक ऐडमिनिस्ट्रेटिव- द हार्ट ऑफ गवर्नेंस' की सिफारिशों में इसे उठाया गया। इस कमिशन ने कहा था कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन के प्रावधान को बढ़ावा देना चाहिए और अटेस्ट की प्रक्रिया आसान की जानी चाहिए।
केंद्र ने राज्य सरकारों को भेजा मेमो
विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "केंद्र के इस फैसले के बाद कई मंत्रालयों और राज्य सरकारों ने अब सेल्फ अटेस्ट किए हुए कागजात स्वीकार करने शुरू कर दिए हैं। हालांकि इसमें ये भी नियम है कि लोगों को फाइनल राउंड में अपने ओरिजनल डाक्युमेंट्स जरूर जमा कराने होंगे। जिससे जांच में आसानी हो सके।"
इस मामले में एक केंद्र की ओर से एक मेमो सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को भेजा गया है।
फिलहाल सरकार ये भी योजना बना रही है कि आखिर कैसे सेल्फ अटेस्ट कागजात को सभी जगह सर्वमान्य बनाया जाए। हालांकि अभी इस मुद्दे पर सरकार कोशिश में जुटी हुई है।
सरकार की ओर से सेल्फ अटेस्ट कागजात को मान्य बनाना वाकई अच्छा कदम है। इस नए नियम से जहां लोगों का पैसा बचेगा, वहीं लोगों का काफी समय भी बचेगा जो उन्हें अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने में बिताने पड़ते थे।