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पुराने दोस्त की मौत के बाद किया वादा गडकरी ने नहीं किया पूरा

Thu, 04 Jun 2015 12:46 PM IST
Updated Thu, 04 Jun 2015 12:46 PM IST
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gopinath munde death road safety law

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत होने के एक साल बाद भी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मोटर वाहन कानून को सख्त नहीं कर पाया है।

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हालांकि उस समय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि एक महीने के अंदर सख्त कानून बनाया जाएगा।

एक साल पहले अपने साथी की मौत पर गडकरी ने कहा था कि विकसित देशों में जिस तरह का सड़क सुरक्षा कानून है, उसका अध्ययन कर एक महीने में भारत में भी मोटर वाहन विधेयक तैयार कर लिया जाएगा और इसे संसद से पास कराकर तीन महीने में लागू कर दिया जाएगा। तब से एक साल बीत चुका है लेकिन अभी तक कानून सख्त करने की दिशा में कुछ नहीं हो पाया है।

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गडकरी ने कानून सख्त करने का किया था वादा

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सेव लाइफ फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष तिवारी का कहना है कि सरकार जिस तरह से इस पर काम कर रही है, उसमें सवाल उठना स्वाभाविक है।

मुंडे के निधन के बाद जब मोटर वाहन कानून 1988 में संसेव लाइफ फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष तिवारी का कहना है कि सरकार जिस तरह से इस पर काम कर रही है, उसमें सवाल उठना स्वाभाविक है।

मुंडे के निधन के बाद जब मोटर वाहन कानून 1988 में संशोधन के लिए पहला मसौदा बना, उसमें काफी सख्त प्रावधान थे। उदाहरण के लिए तय सीमा से 10 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति से वाहन चलाने पर 2,500 रुपए जुर्माने की बात कही गई थी।

विधेयक के अब तक बन चुके हैं चार मसौदे

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इसी तरह तय सीमा से 20 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा की गति से वाहन चलाने पर 5,000 रुपए और 30 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की गति से वाहन चलाने पर 10,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान था लेकिन बाद में ये तेवर कायम नहीं रह पाए।

स्थिति तो यह है कि इस समय विधेयक का जो मसौदा बना है उसमें 10 किलोमीटर के लिए 1,000 रुपए, 20 किलोमीटर के लिए 1,500 रुपए और 30 किलोमीटर के लिए 2,000 रुपए का प्रावधान कर दिया गया है।

तिवारी कहते हैं कि इस विधेयक के अभी तक चार मसौदे बन चुके हैं। पहले मसौदे में जो सख्ती थी, वह अगले मसौदे में ढीली होती चली गई। फरवरी 2015 में जो चौथा मसौदा आया, उसमें तो तेवर एकदम ही ढीले पड़ गए। एक तरह से यह कानून पंगु हो गया। पहले लाल बत्ती तोड़ने के लिए जुर्माना 2,500 रुपये था जिसे अब घटा कर 500 रुपये कर दिया गया है।

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