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पंकजा मुंडे ने बढ़ाई गडकरी की टेंशन

Fri, 29 Aug 2014 10:53 AM IST
Updated Fri, 29 Aug 2014 10:53 AM IST
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Gopinath munde daughter start sangharsh yatra in maharashtra.

दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे की संघर्ष यात्रा ने महाराष्ट्र भाजपा में अंदरूनी कलह बढ़ा दी है। इस यात्रा में जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी गुट अलग-थलग पड़ गया है वहीं सूबे में पार्टी के दो गुट आमने-सामने आ गए है।

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हालांकि इस संघर्ष यात्रा के जरिए भाजपा का मकसद चुनाव में सहानुभूति बटोरने का है, लेकिन दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है।

पंकजा मुंडे ने बृहस्पतिवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की माता जीजाबाई की जन्मस्थली सिंधखेड़ राजा (विदर्भ) से राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की उपस्थिति में संघर्ष यात्रा की शुरुआत की।
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विदर्भ, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गढ़ माना जाता है, लेकिन पंकजा मुंडे की संघर्ष यात्रा में गडकरी गुट को महत्व नहीं दिया गया।

3 हजार किलोमीटर की यात्रा

Gopinath munde daughter start sangharsh yatra in maharashtra.

महाराष्ट्र भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल को हराने वाले नाना पाटोले जैसे दिग्गज नेताओं को भी दरकिनार कर दिया गया।

पंकजा की संघर्ष यात्रा को दिवंगत मुंडे के समर्थक नेताओं को लामबंद करने का प्रयास माना जा रहा है। चर्चा है कि गडकरी गुट को नजरंदाज कर गुटबाजी बढ़ाने में महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेन्द्र फडणवीस की भी बड़ी भूमिका है।

पंकजा मुंडे की संघर्ष यात्रा करीब 3 हजार किलोमीटर क्षेत्र में 21 जिले और 79 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इस दौरान 200 स्थानों पर स्वागत, 600 से अधिक गांवों में संवाद और 65 जनसभाएं होगी।

पंकजा ने यात्रा की जो राह चुनी है उन 79 विधानसभाओं में अधिकतर भाजपा के विधायक हैं। गोपीनाथ मुंडे जब जीवित थे, तब वे ही सीएम पद के दावेदार थे, इसलिए संघर्ष यात्रा के माध्यम से वह स्वयं को अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में पेश करेंगी।

भाई की राह में रोड़ा

Gopinath munde daughter start sangharsh yatra in maharashtra.

गोपीनाथ मुंडे की मृत्यु के बाद भाजपा का एक खेमा उनके बड़े भाई पंडित मुंडे के पुत्र धनंजय मुंडे को पार्टी में शामिल करना चाहता है। पर, पंकजा मुंडे भाई धनंजय की राह में रोड़ा बनकर खड़ी हो गई हैं।

पंकजा बीड जिले की परली विधानसभा से विधायक हैं, लेकिन अब उस स्थान पर अपनी छोटी बहन को लड़ाना चाहती हैं जबकि पिता की मृत्यु से रिक्त हुई बीड लोकसभा सीट से खुद लड़कर केंद्र में मंत्री बनना चाहती हैं।

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