मोदी सरकार में इन पांच लोगों के आए अच्छे दिन
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भारत के निवासी अब भी यह समझने में लगे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए अच्छे दिन किसके होंगे। पहले बुलेट ट्रेन आएगी या फिर उनके घर में एक शौचालय होगा। पहले बड़े-बड़े उद्योगो की मशीनें चलेंगी या फिर बिजली से घरों में बल्ब।
लेकिन वहीं कुछ लोगों के लिए तो मोदी के सत्ता में आते ही दिवाली, ईद और होली की खुशियां एक साथ घर लौट आई हैं।
अमित शाह, मायाबेन कोडनानी, अभय चूड़ासमा, जीएल सिंघल, एके शर्मा वो लोग हैं जो कल तक बियाबां में थे लेकिन अब सत्ता के गलियारों में लौट आए हैं।
अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसी के सबसे ज़्यादा अच्छे दिन आए हैं तो वो हैं अमित शाह। इन पर हत्या में शामिल होने का केस चल रहा है। फिलहाल ये मामला अदालत में लंबित है और शाह जमानत पर रिहा हैं। मोदी ने इन्हें 2014 के चुनाव का 'मैन ऑफ़ दी मैच' बताया है और वे बीजेपी के अध्यक्ष बना दिए गए।
इशरत जहाँ और सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले की जांच करने वाले जिन दो अफ़सरों को इनमें कथित तौर पर अमित शाह के हाथ होने के सुराग मिले, उनका भारत सरकार ने हाल ही में गुजरात से बाहर तबादला कर दिया।
सतीश वर्मा जिन्होंने इशरत मामले की जांच की थी, उन्हें शिलांग में नार्थ ईस्टर्न पावर कारपोरेशन लिमिटेड भेज दिया गया। और रजनीश राय जिन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की जाँच की थी, उनका झारखण्ड के जादूगोड़ा तबादला कर दिया गया।
शाह के सितारे अब आसमान चूम रहे हैं और वे अपने बेटे के लिए सियासी पिच तैयार कर रहे हैं।
गुजरात दंगों में सजायाफ्ता माया आई जेल से बाहर
किसी ज़माने में नरेंद्र मोदी के गुजरात कैबिनेट का उभरता सितारा रहीं मायाबेन कोडनानी 2002 के दंगो के नरोदा पाटिया मामले में 28 साल की सज़ा के बाद एक टूटे तारे की तरह जेल की काल कोठरी में बंद थीं।
लेकिन इसे संयोग ही कहा जाएगा कि मोदी सरकार के आने के बाद अब वह वापिस खुले आकाश के नीचे सांस ले रही हैं।
गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें दो महीने पहले जमानत दे दी और उनकी सज़ा पर रोक लगा दी गई है। अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में अपने पति के साथ मायाबेन एक अस्पताल चलाती हैं।
नरोदा पाटिया में 95 लोग दंगो के वक़्त मारे गए थे और कई दंगा पीड़ितो के परिवार वालो ने कोर्ट में गवाही भी दी थी।
सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का आरोपी भी आया जेल से बाहर
अमित शाह के बेहद करीबी और हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले एसपी अभय चुड़ासमा से पुलिस महकमे में सभी घबराते हैं। सीबीआई ने इन्हें सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार किया और इन पर कई गंभीर आरोप लगाए।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि अमित शाह ने सोहराबुद्दीन का फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने के लिए डीजी वंज़ारा और चुड़ासमा को कहा था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि वह सोहराबुद्दीन के साथ मिलकर एक 'एक्सटॉर्शन रैकेट' चलाते थे।
लेकिन गिरफ्तार होकर भी किसी न किसी तरीके से चुड़ासमा ज़्यादा समय अस्पताल में ही रहे। इस साल अप्रैल में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
पिछले महीने उन्हें गुजरात पुलिस में बहाल कर दिया गया और पुलिस महानिदेशक के विजिलेंस स्क्वॉयड का मुखिया बना दिया गया। ख़ैर उन पर लगे सारे आरोप ज्यों के त्यों हैं। क्या गुजरात पुलिस या सरकार या कहीं और किसी को चुड़ासमा की कमी खल रही थी?
जीएल सिंघल को बनाया एसआरपी कमांडेंट
जीएल सिंघल इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले अफसर थे। हिरासत के बाद सीबीआई को सिंघल के घर से कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली थी।
एक न्यूज़ पोर्टल ने वही कथित ऑडियो टेप्स जारी करने का दावा करते हुए कहा कि इसमें अमित शाह, सिंघल और आईपीएस अफसर एके शर्मा से पुलिस तंत्र का इस्तेमाल कर एक लड़की पर जासूसी करवा रहे हैं।
निलंबित होने के बाद ज़िंदगी से हताश सिंघल ने गुजरात सरकार को एक पत्र में अपना इस्तीफा देते हुए कहा था कि उनके इस दुख के समय में उनके साथ कोई नहीं खड़ा रहा। लेकिन दुख के बादल अब छट गए हैं। उन्हें दो महीने पहले गुजरात सरकार ने एसआरपी का कमांडेंट बना दिया है।
एके शर्मा को भी मिला तोहफा
महिला की जासूसी के कथित मामले ने जितना अमित शाह को परेशान किया था, उतना ही आईपीएस अफसर एके शर्मा को भी। गुजरात सरकार और ख़ासकर शाह के बेहद करीबी शर्मा परदे के पीछे से काम करने वालो में से हैं।
लेकिन जीएल सिंघल की दी हुई रिकॉर्डिंग ने इन्हें कथित तौर पर बेनकाब कर दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त अहमदाबाद (क्राइम ब्रांच) शर्मा को अब भारत सरकार ने सेंट्रल डेपुटेशन के लिए ज्वॉयंट सेक्रेटरी के पद पर पैनल में शामिल किया है।