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अब भूमि अधिग्रहण तभी, जब दो तिहाई लोग होंगे राजी

Wed, 17 Oct 2012 01:10 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 17 Oct 2012 01:10 AM IST
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GoM approved land acquisition bill
मतभेदों को एक तरफ रखते हुए विवादित भूमि अधिग्रहण बिल को मंत्रियों के समूह (जीओएम) ने मंगलवार को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण कानून में व्यापक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण इस बिल को कैबिनेट और उसके बाद संसद के आगामी शीत सत्र में पेश करने का रास्ता साफ हो गया है।
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कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता वाले जीओएम से मंजूर इस बिल के मसौदे में किसी भूमि के अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले दो तिहाई लोगों की मंजूरी अनिवार्य होने का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि इसमें पिछली तारीख से जमीन अधिग्रहीत करने का प्रावधान नहीं है।
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बैठक के बाद पवार ने बताया कि भूमि अधिग्रहण बिल के मौजूदा मसौदे के मूल सिद्धांतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। मसौदे में शामिल मुआवजा राशि, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के प्रावधानों को भी नहीं बदला गया है। उन्होंने बताया कि खेतिहर जमीन के अधिग्रहण पर पहले की तरह ही रोक लगी हुई है।
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कोई अन्य विकल्प न होने की स्थिति और सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के लिए ही सीमित मात्रा में ही उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा सकेगा। लेकिन इसके लिए भी ग्रामसभा, ग्राम पंचायत और प्रभावित होने वाले दो तिहाई लोगों की मंजूरी होना अनिवार्य है।

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि मसौदे में मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन के  प्रावधानों पर आम सहमति है। मसौदे में पिछली तिथि से जमीन अधिग्रहीत करने का प्रावधान नहीं है, बल्कि इसकी जगह एक कट ऑफ डेट तय की जाएगी, जिसके बारे में बाद में फैसला किया जाएगा।

रमेश के मुताबिक विभिन्न मंत्रालयों से मिले सुझावों को बिल में शामिल करने के संबंध में बुधवार को कृषि मंत्री से चर्चा करके मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अगले दो सप्ताह में इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश कर दिया जाएगा। जयराम ने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगामी शीतकालीन सत्र में भूमि अधिग्रहण बिल के संशोधित मसौदे को लोकसभा में पेश किया जाएगा।

इन तीन प्रमुख मुद्दों पर थे 14 सदस्यीय जीओएम में मतभेद
-भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले 80 फीसदी लोगों की रजामंदी अनिवार्य होने के प्रावधान पर
-पिछली तारीख से जमीन अधिग्रहीत करने के प्रावधान पर
-जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि के मामले पर

कोट--
जिन मुद्दों पर भी मतभेद थे, हम उन सभी पर एक राय बनाने में कामयाब रहे हैं। अब बिल का मसौदा तैयार है।
शरद पवार, कृषि मंत्री

भूमि अधिग्रहण विधेयक

-अधिग्रहीत की जाने वाली जमीन के लिए प्रभावित होने वाले दो तिहाई लोगों की मंजूरी अनिवार्य
-जमीन मालिकों को मौजूदा बाजार मूल्य के समकक्ष कीमत मिल सकेगी। साथ ही पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के साथ ही मुआवजा राशि में भी खासी बढ़ोतरी।
-इसमें तत्काल जरूरत के तहत किसानों से जबरन जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकेगा।
-बहु फसली भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा
-सरकार को अहम ढांचागत योजनाओं के लिए यदि किसी भी सूरत में जमीन नहीं मिलती तब वे सिर्फ  पांच फीसदी ही खेतिहर भूमि को अधिग्रहीत कर सकेंगी लेकिन उसके बदले उतनी बंजर जमीन को विकसित भी किया जाना जरूरी किया गया है।

कई मंत्रियों ने जताया था ऐतराज
28 अगस्त की कैबिनेट बैठक में भूमि अधिग्रहण बिल का जो संशोधित मसौदा पेश किया गया था। उसमें वाणिज्य मंत्रालय की कई सिफारिशों को शामिल नहीं किया गया था। कुछ पहलुओं पर ग्रामीण विकास मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के बीच शुरू से ही गंभीर मतभेद रहे हैं।


वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा कैबिनेट मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री को एक नोट भेजकर तमाम मुद्दों पर सहमति बनने तक बिल को पास न कराने का अनुरोध किया था। बैठक में अन्य मंत्रियों ने भी कहा कि बिल का फाइनल ड्राफ्ट बनाने से पहले उनसे बात नहीं की गई। विरोध करने वालों में आनंद शर्मा के अलावा कमलनाथ, अजित सिंह, वीरप्पा मोइली और सीपी जोशी आदि कई मंत्री शामिल थे।
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