'गोडसे' को बैन किए जाने से आहत हैं सांसद
कई फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया गया, फिर कई शब्दों को प्रतिबंधित कर दिया गया। पर अगर जिस जाति विशेष में आप पैदा हुए उसी को प्रतिबंधित कर दिया जाए। तो क्या होगा?
ऐसा ही कुछ हुआ है देश की संसद के अंदर। जहां पर एक किसी के नाम से जुड़ा एक विशेष शब्द ही असंसदीय घोषित कर दिया गया हो।
शिवसेना के सांसद हेमंत गोडसे ने लोकसभा और राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी जाति को असंसदीय शब्दों की सूची से हटाया जाए।
लोक सभा सचिवालय ने सांसद के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को नाम से जुड़ी जाति गोडसे को लेकर कुछ गलती हुई है। पर इस विषय में अंतिम निर्णय लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष ही लेंगे।
अधिकारी जानते हैं कि रिकॉर्डस के मुताबिक किस 'गोडसे' को अंससदीय शब्द के तौर पर प्रतिबंधित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 1956 में लोकसभा के डिप्टी स्पीकर हुकुम सिंह ने इस बाबत आदेश दिए थे। उस समय स्टेट रिऑर्गनाइजेशन बिल पर चर्चा हो रही थी। तभी दो सांसदों ने नाथूराम गोडसे के नाम को उछाला था। इसके बाद हुकुम सिंह ने ऐसे आदेश दिए थे।
'नहीं बदलूंगा अपनी जाति'
वर्ष 2014 में संसद के शीत सत्र के दौरान सीपीएम के सांसद पी राजीव ने हिंदू महासभा की तरफ से देश भर में नाथूराम गोडसे के बुत लगाने के खिलाफ आवाज उठाई थी। तब पी जे कुरियन ने एक बार फिर से पूर्व में लिए गए निर्णय की तरफ लोगों को बताया था।
सांसद हेमंत गोडसे ने कहा कि गोडसे शब्द को असंसदीय शब्द की श्रेणी में शामिल करना एक समुदाय विशेष और मेरे लिए बहुत ही पीड़ा की बात है। इस जाति के साथ महाराष्ट्र में बहुत से लोग रहते हैं।
संसद के रिकॉर्ड के मुताबिक 'गोडसे' शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यह एक असंसदीय शब्द है। हेमंत गोडसे ने पत्र में लिखा है कि यह कैसे किया जा सकता है कि एक सांसद की जाति को अंससदीय शब्द की सूची में रख दिया जाए। यह मेरी गलती नहीं है कि मेरी जाति गोडसे है। इसके लिए मैं कुछ नहीं कर सकता हूं और न ही अपनी जाति को बदलने जा रहा हूं।