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हर 10 साल बाद दिखेगा बारिश से तबाही का मंजर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jun 2013 12:09 AM IST
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कहा जाता है कि उत्तराखंड में बारिश से आई तबाही जैसा मंजर सौ सालों में एक दफा देखने को मिलता है लेकिन विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट की माने तो शताब्दी के अंत तक ऐसे भयावह दृश्य प्रत्येक दस साल में ही नजर आने लगेंगे।
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दुनिया के सभी देशों ने समय रहते अगर जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो अतिवृष्टि और सूखाग्रस्त इलाकों का बढ़ता दायरा बड़े पैमाने पर खतरा उत्पन्न कर सकता है।
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विश्व बैंक की जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर बुधवार को जारी रिपोर्ट में इस तरह की आशंकाएं जताई गई है।
रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में यह चेतावनी दी गई है कि अगले 10 साल में धरती का औसत तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने से देश में गर्मी और मानसून के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा।
तस्वीरों में देखिए: तबाही का मंजर
वर्षा के बदलते पैटर्न से भविष्य में भयंकर गर्मी, सूखे की संभावना के बढ़ने के साथ भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा।
समुद्र का स्तर साल 2050 तक 50 सेंटीमीटर और 2100 में 100 सेंटीमीटर तक ऊपर आ सकता है। ऐसे में कई जनसंख्या बहुल इलाकों के जलमग्न होने का खतरा मंडराएगा।
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बिजली उत्पादन, सिंचाई और पेयजल के लिए कुछ इलाकों में जरूरत से अधिक पानी मिलेगा तो कुछ कई प्रदेश इसके लिए तरसते रह जाएंगे।
जलवायु परिवर्तन की वजह से देश में सिंचाई के जल स्रोत सीमित होने से खेती के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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विश्व बैंक के मुताबिक वर्ष 2040 तक गर्मी बढ़ने से अनाजों की उत्पादकता कम होने का अनुमान है।
चिंताजनक तथ्य यह है कि वर्ष 2050 तक तापमान बढ़ने से गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों से कृषि उत्पादन के लिए जल की उपलब्धता कम होने लगेगी। इससे करीब 6 करोड़ 30 लाख लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष विश्व बैंक की रिपोर्ट में यह कहा गया था कि अगर दुनिया के सभी देश समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाते हैं तो इस शताब्दी के अंत तक दुनिया का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।