और सस्ता होगा पेट्रोल, ऐलान का करें इंतजार
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कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट का असर शेयर बाजार पर देखा जा रहा है। कच्चे तेल के दाम गिरकर 50 डॉलर प्रति बैरल तक गिर जाने से शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। सेंसेक्स में करीब 600 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल के दामों में ये बड़ी गिरावट है।
कच्चे तेल के दामों में गिरावट से देश में पेट्रोल डीजल तो सस्ता हो सकता है लेकिन इससे रुपए का अवमूल्यन का भी खतरा है। रुपए के अवमूल्यन से अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक बुरा असर पड़ सकता है। कच्चे तेल के दाम गिरने का फायदा, सरकार लोगों को कब तक देती है, इसके लिए हमें इंतजार करना होगा।
लगातार कम हो रहे कच्चे तेल के दाम
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल कीमत लगातार गिरती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय बॉस्केट के कच्चे तेल की कीमत 23 दिसंबर को 57.17 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई थी जो अब गिरकर 50 डॉलर के आसपास हो गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बॉस्केट के लिए कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत 23-12-2014 को घटकर 57.17 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रही। 22 दिसंबर को यह कीमत 59.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी।
क्या है तेल की कीमत कम होने की वजह?
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने की वजह अमेरिका, यूरोप और चीन में ब्रैंट क्रूड की मांग में कमी आना था। अमेरिका, चीन और यूरोप के देशों ने अपने यहां ही क्रूड ऑयल का उत्पादन शुरू कर दिया। इससे ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज(ओपेक)देशों के ब्रैंट क्रूड ऑयल की मांग कम हो गई।
इसका नतीजा यह हुआ कि ओपेक देशों के सदस्य देशों कुवैत और इराक ने क्रूड ऑयल पर भारी डिस्काउंट देना शुरू कर दिया। इसके चलते दूसरे देशों को सस्ता ब्रैंट क्रूड मिलने लगा। भारत भी खाड़ी देशों से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल का आयात करता है। इसका सीधा फायदा भारत के लोगों को मिलने लगा है।