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अटल के जन्मदिन पर हुए हवन को बताया 'घर वापसी हवन'

Fri, 26 Dec 2014 01:08 PM IST
Updated Fri, 26 Dec 2014 01:08 PM IST
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ghar vapsi hawan on atal bihari birthday.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सुशोभित कर पूरे देश की वाहवाही लूट रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यप्रणाली से बिल्कुल उलट स्थानीय जनसंघी नेता लगातार बड़बोलेपन से फंसते जा रहे हैं। गुरुवार को भी ऐसा ही हुआ। जब जनसंघी अटल जी के जन्मदिन पर हो रहे हवन कार्यक्रम को धर्म जागरण समिति के विभाग प्रमुख सत्यप्रकाश नवमान ने ‘घर वापसी’ हवन बता दिया।

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बड़बोलेपन में नवमान ने मीडिया के सवालों पर कहा कि हर साल ‘घर वापसी’ करने वालों की मंगल कामना के लिए 25 दिसंबर को हवन होता है। रामलीला मैदान का हवन भी उसी सिलसिले में हुआ। नवमान यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि इसी तरह के हवन और भी हुए हैं, जहां घर वापसी करने वालों के लिए हवन किए गए। इस बयान के बाद पुलिस प्रशासन में भी खलबली मची और नवमान की निगरानी बढ़ा दी गई। उधर, धर्म जागरण समिति के बृजेश कंटक ने बताया कि घर वापसी कार्यक्रम स्थगित होने के बाद कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

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एसपी सिटी पंकज पांडेय ने बताया कि सुबह छह बजे से ही नवमान के आवास पर सशत्र लैपर्ड का पहरा था। वह घर से गायब रहे। रामलीला मैदान में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर हुए हवन कार्यक्रम में शामिल हुए और इसके बाद से फिर कहीं चले गए। उनकी लगातार निगरानी हो रही है। उनके साथ बृजेश कंटक की भी निगरानी हो रही है। कहीं भी घर वापसी का कोई आयोजन नहीं हुआ है। यह सब भ्रामक प्रचार कर नाम कमाने की कसरत भर है।
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भाजपा जिलाध्यक्ष चौ. देवराज सिंह का कहना है कि सत्यप्रकाश नवमान और बृजेश कंटक भाजपा के सदस्य नहीं हैं। वह आरएसएस से जुड़े हैं।

पुलिस ने छापा मारकर रुकवाया ईसाइयों का कार्यक्रम

ghar vapsi hawan on atal bihari birthday.

अलीगढ़ के जलाली इलाके के गांव शाहजहांपुर ताजपुर में धर्मांतरण की अफवाहों पर बृहस्पतिवार सुबह पुलिस ने फिर छापेमारी की। यहां हिंदुओं को ईसाई बनाने संबंधी कार्यक्रम की चर्चाएं थीं। इस आशंका पर पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लेकर घरों की तलाशी ली, हालांकि घरों से कुछ नहीं मिला। मगर एक बुर्जी से बाइबल जरूर मिली। बाद में गांव में पुलिस तैनात रही और हिरासत में लिए गए लोगों को हिदायत देकर छोड़ा गया। फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर ग्रामीणों में रोष है।

गुरुवार की सुबह हरदुआगंज थाना प्रभारी पहलवान सिंह महिला पुलिस को लेकर शाहजहांपुर ताजपुर पहुंचे। पुलिस ने गांव के ही रमेश और ताराचंद के घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान पुलिस को रमेश के घर के पास की बुर्जी से एक बाइबल मिली है। इससे पुलिस आशंका जता रही थी कि यहां पर कोई समारोह होने वाला था। ग्रामीणों का आरोप था कि पिछले ढाई वर्ष से यहां पर हर सप्ताह प्रार्थना के बहाने लोगों को बुलाया जाता है और उनको धार्मिक सामग्री वितरित कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा जाता है। उनको नौकरी, पैसा और भूत-प्रेत से बचने जैसे प्रलोभन दिए जाते हैं। इतना ही नहीं मिशनरी स्कूल में नौकरी देने का झांसा दिया जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि इसी गांव के दो परिवारों ने 15 साल पूर्व ईसाई धर्म अपनाया था। आज दिल्ली में किसी मिशनरी के स्कूल में नौकरी कर रहे हैं। लोगों में इसका उदाहरण दिया जाता है। पुलिस ने हिरासत में लिए रमेश और दौजीराम को देर शाम हिदायत देते हुए छोड़ दिया। बताया जाता है कि इस कार्यक्रम के लिए 50 लोगों के खाने की व्यवस्था थी।

एसओ हरदुआगंज पहलवान सिंह यादव ने बताया कि गांव में सत्संग जैसे किसी आयोजन की खबर पर मैं खुद पुलिस के साथ गया था। जिसे लेकर लोगों में भ्रम था। आयोजन से जुड़े लोगों के घरों की तलाशी ली गई। मगर वहां कोई ऐसी आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली, जिसकी चर्चा उड़ रही है। चूंकि इस तरह के किसी आयोजन की कोई अनुमति नहीं थी। इसलिए कार्यक्रम नहीं होने दिया गया। जो लोग हिरासत में लिए गए थे, उन्हें शाम को सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया गया। बाकी पूरे मामले को तूल दिया जा रहा है।

धर्मांतरण की सूचना पर दौड़ी पुलिस, खलबली
धर्मांतरण की सूचना पर शाम  को पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई और पुलिस थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव सलेमपुर पहुंच गई। वहां पुलिस ने पूरी छानबीन व पूछताछ की तो पता चला कि एक परिवार के कुछ लोग अपनी स्वेच्छा से क्रिसमस का त्योहार मना रहे हैं और एक बच्चे का नामकरण कर रहे हैं। इस पर पुलिस वहां से लौट आई। इधर, क्रिसमस मनाने वाले लोगों का कहना था कि वह बिना किसी दवाब के अपनी इच्छा से इस त्योहार को मनाते हैं और इस बच्ची का नामकरण कर रहे हैं।

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