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मोदी पर अब भी कायम है जर्मन निवेशकों का भरोसा

Sat, 03 Oct 2015 05:25 PM IST
Updated Sat, 03 Oct 2015 05:25 PM IST
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German businessmen shows faith on Modi

अमेरिका में फेसबुक टाउन हॉल की अपनी चर्चाओं से सुर्खियों में बने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की आर्थिक तस्वीर बदलेंगे जर्मनी में इसको लेकर भरोसा अब भी कायम है।

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जर्मन सरकार के नुमाइंदों और निवेशकों को पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की तस्वीर को बदल देंगे। जर्मन निवेशक इस लिहाज से चासंलर मर्केल की अगले हफ्ते की शुरूआत में हो रही भारत यात्रा को बेहद अहम मान रहे हैं।
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उनका मानना है कि भारत में भले ही विदेशी निवेशकों को अब भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें भूमि अधिग्रहण की चुनौती सबसे ज्यादा है। इसके बावजूद पीएम मोदी निवेशकों के लिए राह जल्द आसान बनाएंगे इसकी उम्मीद कायम है। जैसा कि जर्मनी में विपक्षी खेमे के एक प्रमुख दल ग्रीन पार्टी की सांसद बार्बेल हॉन कहती हैं कि पीएम मोदी का सोलर ऊर्जा का 1.70 लाख गीगावाट का 2022 तक उत्पादन का लक्ष्य काफी बड़ा है।
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ऊर्जा का ग्रीन कॉरीडोर बनाने के उनके इस ऐलान पर जर्मनी में भी काफी हलचल है। क्योंकि जर्मनी अक्षय ऊर्जा के सभी स्रोतों पवन, सौर और पन बिजली उत्पादन में दुनिया का सबसे अग्रणी देश है।

जर्मनी की तमाम इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों की निगाहें मोदी के इस ऐलान के बाद भारत की ओर हैं। इस लिहाज से चांसलर मर्केल की भारत यात्रा में सोलर ऊर्जा को लेकर कुछ बड़ी घोषणा और हस्ताक्षर होने की संभावना है।

सौर ऊर्जा का ग्रीन कारीडोर का ऐलान खींच रहा कारोबारियों को

German businessmen shows faith on Modi

जैसा कि यहां की ऊर्जा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी इआन के पालिसी एडवाइजर पीटर हॉस ने कहा कि निसंदेह मोदी से जर्मनी के निवेशकों को काफी सकारात्मक उम्मीद है। उनके अनुसार अमेरिका यात्रा में वहां के बड़े निवेशकों ने भारत में निवेश को लेकर जैसी दिलचस्पी का इजहार किया जर्मन निवेशकों में भी वैसी ही रुचि है।

मर्केल के साथ भारत यात्रा पर जर्मन निवेशकों का एक बड़ा दल भी आ रहा है। हॉस के अनुसार इस दल में संभवत: वे भी शामिल रहेंगे। यूरोपीय संघ के सहयोग से संचालित थिंक टैंक क्लिन एनर्जी वायर के डायरेक्टर मीडिया प्रोग्राम कारेल कारलोविज मोन ने हास की राय से सहमति जताते हुए कहा कि वास्तव में जर्मनी ही नहीं यूरोप की निगाहें मोदी की वजह से भारत पर लगी है।

कार्बन उत्सर्जन को घटाने को लेकर चल रही बहसों के बीच मोदी ने जिस तरह ग्रीन ऊर्जा के साथ भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विकास की रुपरेखा दिखाई है उसमें जर्मनी के लिए सबसे ज्यादा मौका है। यह बात भी यूरोप समेत सभी को मालूम है कि मौजूदा आर्थिक दौर में भारत समेत कुछ उभरते देश ही हैं जहां विकास की रफ्तार तेज रहने के आसार हैं। इसलिए जमीन अधिग्रहण कानून में सुधार की मोदी की पहल थम जाने के बाद भी निवेशकों को भरोसा है कि आर्थिक रफ्तार न थमे इसका रास्ता मोदी जरूर निकालेंगे।

चासंलर मर्केल की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा के अलावा भारत के सौ स्मार्ट सिटी, गंगा की सफाई के अलावा जर्मनी में भारतीय आईटी इंजीनियरों की संख्या बढ़ाने आदि को लेकर अहम समझौते की संभावना यहां जताई जा रही है।

जर्मन मीडिया में भी मोदी और मर्केल की नई दिल्ली में प्रस्तावित मुलाकातों को लेकर खासी चर्चा है।

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