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नहीं बंद हुआ है 'गीताप्रेस', पहले जैसी हो रही छपाई

Tue, 21 Jul 2015 11:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोरखपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, गोरखपुर Updated Tue, 21 Jul 2015 11:47 PM IST
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Geeta press is still printing books.

इन दिनों सोशल साइट्स पर गीताप्रेस के बंद होने की अफवाह काफी तेजी से चल रही है। गीताप्रेस प्रबंधन ने इन अटकलों को खारिज किया है। कहा कि इस साल भी गीताप्रेस का पिछले कई सालों की तरह ढाई से पौने तीन करोड़ किताबें छापने का लक्ष्य है।

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गीता प्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल का कहना है कि प्रेस के बंद होने की सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इस वर्ष भी गीताप्रेस अन्य वर्षों की तरह से ढाई से पौने तीन करोड़ पुस्तकें प्रकाशित करेगा। मंगलवार को भी गीताप्रेस की मशीनें हमेशा की तरह बखूबी चलीं।
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गीता प्रेस के ट्रस्टी देवीदयाल ने बताया कि हमारी पुस्तकों की लोकप्रियता की वजह कम कीमत के साथ बेहतर प्रिंटिंग भी है। गीताप्रेस का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है। हम सद्प्रचार के लिए पुस्तकें छापते हैं।
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गीता प्रेस के प्रोडक्शन मैनेजर लालमणि तिवारी का कहना है कि अब भी हमारी किताबों की बिक्री प्रतिदिन 50 हजार प्रतियों से ज्यादा है। धार्मिक किताबों में आज की तारीख में सबसे ज्यादा मांग रामचरित मानस की है।

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