अलगाववादी गिलानी का मोदी पर बड़ा खुलासा!
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भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी से हालिया इंटरव्यू में जब पूछा गया कि चीन और पाकिस्तान को लेकर उनकी नीति क्या होगी, तो उनका कहना था कि न आंखें दिखाकर बात होगी और न आंखें झुकाकर। वो सीमा पर हिंदुस्तानी सैनिकों के सिर काट ले जाने पर मनमोहन सरकार को खरी-खोटी सुनाते रहे हैं।
जाहिर है, अगर भाजपा की अगुवाई में अगली सरकार बनी, तो कश्मीर मुद्दे को लेकर मोदी के रुख पर खास निगाह रखी। और इसी मुद्दे को लेकर मोदी चर्चा मे आ गए हैं। कट्टरपंथी अलगाववादी सय्यद अली शाह गिलानी ने गुजरात के मुख्यमंत्री को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है, जिससे भाजपा मुश्किल में आ सकती है।
मोदी ने मेरे पास भेजे दूतः गिलानी
गिलानी ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने में मदद देने के लिए उनके पास दूत भेजे थे, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया।
गिलानी ने कहा, "22 मार्च को दो शख्स मुझसे मिलने आए। वो लोग हमारे पंडित भाई थे, जो कश्मीर विवाद को सुझलाने में मेरी मदद चाहते थे।" उन्होंने यह नहीं बताया कि ये दोनों कौन हैं। गिलानी के मुताबिक उनसे सवाल किया गया था कि क्या वो मोदी से बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि अगर मैं किसी भी तरह की मदद देने के लिए तैयार हूं तो सीधा मोदी से संपर्क कर सकता हूं।"
'सभी को पता है आरएसएस, भाजपा की नीति'
गिलानी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और उनसे कहा कि मोदी आरएसएस से आए हैं और उसी विचारधारा को मानते हैं। गिलानी के मुताबिक सभी को आरएसएस और कश्मीर पर भाजपा की राय पता है, जिसकी नुमाइंदगी मोदी करते हैं।
उन्होंने बताया, "मैंने उनसे कहा कि 2002 के गुजरात दंगों के वक्त मुख्यमंत्री के रूप में मोदी की भूमिका क्या थी और तीन हजार मुस्लिमों का कत्लेआम किस तरह हुआ। मैंने उनसे यह भी कहा कि मोदी कश्मीर मुद्दा सुलझाने को लेकर कभी भी किसी तरह की उदारता या संजीदगी नहीं दिखा सकते।"
'भाजपा ने की कश्मीरी नेताओं से बातचीत'
16 अप्रैल को दिल्ली से लौटने वाले सय्यद अली शाह गिलानी के मुताबिक भाजपा को लगता था कि मोदी ही अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा, "भाजपा ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से बातचीत शुरू कर दी है। मोदी के लोगों ने कश्मीरी नेताओं के दिमाग पढ़ने शुरू कर दिए हैं और उन्हें बता रहे हैं कि कश्मीर पर वो कितनी उदारता से पेश आएंगे।"
गिलानी के मुताबिक कुछ कश्मीरी नेताओं ने यह बात मीडिया के जरिए सार्वजनिक स्तर पर कहनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, "इन नेताओं ने वास्तव में मोदी के दूतों से मुलाकात की है।"
भाजपा ने किया दूत भेजने से इनकार
हुर्रियत के दूसरे धड़े के अगुवा मीरवाइज उमर फारुक ने हाल में कहा था कि वो मोदी को लेकर कुछ उम्मीद रखते हैं और उन्हें आस है कि भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के मिशन को आगे ले जाएगी।
गिलानी ने लोगों से चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह किया। दूसरी ओर गिलानी के दावे पर भाजपा ने कहा कि ऐसा कोई दूत नरेंद्र मोदी की तरफ से नहीं भेजा गया है। भाजपा ने ट्वीट किया, "हमारे पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की ओर से कोई दूत नहीं भेजे गए। यह झूठा और फर्जी दावा है।" हालांकि मामला उछल गया है।
उमर अब्दुल्ला ने मोदी को घेरा
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मामले को लपकते हुए ट्विटर के जरिए भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, "धारा 370 और एएफएसपीए पर भाजपा के रुख से हम सभी वाकिफ हैं, ऐसे में इन दूतों ने कश्मीरी नेताओं से क्या बातचीत की, यह भी बताया जाए। आखिर इतनी गोपनीयता क्यों बरती जा रही है।"
कश्मीर एक संवेदनशील मुद्दा है और चुनावी मौसम में इस तरह का बयान भाजपा को फायदा से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। कांग्रेस को भी बैठे-बैठाए भाजपा पर हमला करने के लिए नया हथियार मिल गया है।