सरकारी आंकड़ों में आए 'अच्छे दिन', खेती-किसानी के बुरे दिन
देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर 7.3 फीसदी के असरदार स्तर पर पहुंच गई है। इससे अर्थव्यवस्था में नए जोश का संचार होने की उम्मीद है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की ओर से शुक्रवार को जारी वर्ष 2014-15 के आर्थिक आंकड़ों में यह बात सामने आई है। मालूम हो कि 2013-14 की अवधि के दौरान जीडीपी की दर 6.9 फीसदी थी। जीडीपी में यह बढ़ोतरी वाणिज्य-कारोबार, होटल, परिवहन, दूरसंचार और प्रसारण से संबंधित सेवाओं में दो अंकों की भारी बढ़ोतरी की बदौलत देखने को मिली।
पूरे वर्ष के चारों तिमाही के हिसाब से देखें तो पहली तिमाही के दौरान 6.7 फीसदी, दूसरी तिमाही के दौरान 8.4 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसदी जबकि अंतिम तिमाही में 7.5 फीसदी की विकास दर दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान औद्योगिक क्षेत्र में महज 4.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई तो कृषि उपज में तो 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
और गर्त में गई खेती
सीएसओ की ओर से शुक्रवार को वर्ष 2014-15 के लिए जारी अस्थायी अनुमानों के मुताबिक, स्थिर मूल्य (2011-12) पर सकल घरेलू उत्पाद 106.44 लाख करोड़ रुपये आंका गया। इस दौरान वर्तमान मूल्य पर देश की प्रति व्यक्ति आय 87748 रुपये आंकी गई, जो कि एक वर्ष पहले के 80388 रुपये के मुकाबले 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
सीएसओ के मुताबिक, देश में खेती की हालत और खस्ता हो गई है। 2014-15 में कृषि उपज में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, बल्कि इसमें पिछले साल के मुकाबले 2.3 फीसदी की गिरावट आई। इस दौरान 251.12 मिलियन टन खाद्यान्न पैदा हुआ, जबकि इससे एक साल पहले 2013-14 की अवधि के दौरान यह 257.07 मिलियन टन रहा था।
उद्योगों ने फूंका उत्साह
उद्योग में देखें तो मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 7.9 फीसदी की बढ़ोतरी के चलते पूरे क्षेत्र की विकास दर 4.8 फीसदी दर्ज की गई। हालांकि इस क्षेत्र में खनन में महज 1.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
पिछले वर्ष सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन शानदार रहा। इसमें कारोबार, होटल, परिवहन, दूरसंचार से संबंधित सेवाओं और प्रसारण क्षेत्र में 10.7 फीसदी की विकास दर हासिल देखी गई। हालांकि इस दौरान वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 2.8 फीसदी की गिरावट देखी गई।
वाणिज्य एवं कारोबार में बढ़ोतरी की बदौलत इस वर्ष बिक्री कर वासूली में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी रही। 2014-15 की अवधि के दौरान वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में 11.5 फीसदी की विकास दर दर्ज की गई जबकि बैंक जमाओं में 10.9 फीसदी और बैंक क्रेडिट में 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी रही।
आंकड़ों से खुश उद्योग जगत
उद्योग संगठन फिक्की के महासचिव दीदार सिंह ने 7.3 फीसदी के विकास दर को उत्साहवर्द्धक बताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान सरकार द्वारा डुइंग बिजनेस के लिए किए गए उपायों का सकारात्मक असर दिखा है। वहीं भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महासचिव चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि जीडीपी के आंकड़ों ने सीआईआई के अनुमानों को सही ठहराया है। सीआईआई पहले से ही कहती रही है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे हैं।
जीडीपी की दर में 7.3 फीसदी की मजबूत बढ़ोतरी से भले ही सरकार और कारोबार जगत खुश हो ले, लेकिन यह दर इस अवधि की अनुमानित दर से कम ही है। इस अवधि के दौरान 7.4 फीसदी की दर का अनुमान लगाया गया था, इस हिसाब से वास्तविक आंकड़ों में यह .1 फीसदी कम ही रही।
कृषि में सुस्ती के बावजूद बेहतर प्रदर्शन
सीएसओ द्वारा जारी किये गए जीपीपी के आंकड़ों पर केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रतिक्त्रिस्या व्यक्त करते हुए कहा कि खेती के क्षेत्र में विकास दर में कमी के बावजूद विकास दर में यह उपलब्धि हासिल हुई है। निर्माण क्षेत्र में एक साल पहले के 5.3 फीसदी विकास दर के मुकाबले इस वर्ष 7.1 फीसदी की विकास दर हासिल हुई है जबकि सेवा क्षेत्र में औसत 10.2 प्रतिशत रहा। यह बेहद उत्साहवर्द्धक है कि आलोच्य वर्ष की चौथी तिमाही में निर्माण क्षेत्र की विकास दर बढ़ कर 8.4 फीसदी पर पहुंच गई।
जीडीपी के आंकड़ों से वित्त मंत्री अरुण जेटली काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जीडीपी आंकड़ों से साफ हो गया कि देश की अर्थव्यवस्था सुधार की ओर अग्रसर है। वित्त मंत्री के मुताबिक, मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी से माना जा सकता है कि भारत आठ-नौ फीसदी की ऊंची विकास दर को हासिल कर सकता है। उन्होंने मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र को उम्मीद की किरण बताया।