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दंगा: अमर उजाला की पड़ताल में खुलासा

Wed, 30 Jul 2014 08:21 AM IST
शशांक मिश्र, चंद्रशेखर शर्मा/अमर उजाला, सहारनपुर
शशांक मिश्र, चंद्रशेखर शर्मा/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 30 Jul 2014 08:21 AM IST
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gasoline used in saharanpur riot

सहारनपुर में चार दिन पहले थाने पहुंची भीड़ को लकड़ी में पॉलिश होने वाले केमिकल की ज्वलनशीलता का अंदाजा था। यही कारण रहा कि भीड़ हथियारों के साथ वुडकार्विंग उद्योग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी लेकर पहुंची थी। अत्यंत ज्वलनशील माने वाले इन केमिकल्स की मदद से ही दंगाइयों ने अंबाला रोड की दुकानों को जलाया था। अंबाला रोड पर दंगे के दौरान जलीं दुकानों के मलबे से मिली केमिकल के केनों का सच अब सामने आने लगा है। अंबाला रोड की दुकानों को जलाने में दंगाइयों ने गैसोलीन और अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया था। इन रसायनों को लकड़ी पर पॉलिश में इस्तेमाल किया जाता है।

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अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि दंगाइयों ने अंबाला रोड की दुकानों में लूटपाट के बाद गैसोलीन, थिनर, बोरिक एसिड आदि केमिकल से आगजनी की थी। दरअसल, सहारनपुर वुडकार्विंग उद्योग का बड़ा केंद्र है और कुतुबशेर के थाने के सामने वाले इलाका ही लकड़ी उद्योग का गढ़ है।
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लकड़ी की पॉलिश और कीड़ों से बचाने के लिए ये केमिकल प्रयोग होते हैं। इससे साफ है कि थाने पर डेरा जमाने से पहले भीड़ ने लकड़ी के कारखानों से इस तरह के रसायनों को निकाल रखा था। वुडकार्विंग उद्योग से जुड़े मयंक अग्रवाल ने बताया कि पेंट में थिनर मिलाया जाता है। इसके अलावा शाइनिंग में भी केमिकल का उपयोग किया जाता है।

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मलबे के पास मिली गैसोलीन की केन

gasoline used in saharanpur riot

मलबे के पास मिले केमिकल की केन जिस कंपनी की है, वह गैसोलीन है। एमएस कॉलेज की रसायन विज्ञान के एचओडी डा. पूनम त्यागी का कहना है कि लकड़ियों में लगने वाले लगभग सभी केमिकल आक्सीजन के संपर्क में आने के बाद अत्यंत ज्वलनशील हो जाते हैं। इनकी तीव्रता का अंदाजा इन केमिकल की महक से लगाया जा सकता है। कीड़ों से बचाने के लिए इनमें कई तरह के एसिड मिलाए जाते हैं।
 
अंबाला रोड पर जलाई गईं दुकानों में ऑटो मोबाइल शॉप्स की संख्या भी थी। दंगाइयों ने लूटपाट के बाद लकड़ी उद्योग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल से आगजनी की थी। दुकानों में रखे मोबिल ऑयल और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के कारण पूरी दुकानें जल गईं। एक भी दुकान ऐसी नहीं बची हैं, जिसमें एकाध चीज भी सुरक्षित बची हो।

जांच में मिलेगी मदद

मंडलायुक्त तनवीर जफर अली का कहना है कि लकड़ी उद्योग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल से ही आग लगाई गई है। यह बिंदु जांच में काफी मददगार साबित होगा। यह बात तो साफ है कि दंगाइयों ने इन्हें एकत्र कर सुनियोजित तरीके से आगजनी की है। केमिकल बेचने और खरीदने वालों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।

क्या परिचितों ने ही जला दीं दुकानें?

gasoline used in saharanpur riot

शहर को दंगे की आग में झोकने वाले उपद्रवियों के बारे में पीड़ित कारोबारियों के हाथ कुछ सुराग लगे हैं। उनका कहना है कि जांच के साथ ही सुरक्षा की पूरी गारंटी मिलने पर वे कुछ अहम जानकारियां अफसरों को दे सकते हैं। वे बड़े सुराग तक पहुंचा सकती हैं। उन्होंने कारोबार से जुड़े कुछ परिचितों के दंगे में शामिल होने का शक जाहिर किया है।

अंबाला रोड पर कई वर्षों से कारोबार चलाने वाले पीड़ित परिवारों ने मंगलवार को बातचीत में यह बात कही। पाकिस्तान के सियालकोट से यहां आकर बसने के बाद 1978 से अब तक कोहली इलेक्ट्रिकल्स, एमएस कोहली आटोमोबाइल्स और कोहली आटोमोबाइल्स के नाम से चल रही तीन प्रतिष्ठान दंगाइयों ने आग के हवाले कर दिए थे। कारोबारी परमजीत सिंह कोहली, मनजीत सिंह कोहली, राजेंद्र सिंह कोहली और गगनदीप सिंह कोहली ने कहा कि 36 साल की मेहनत तबाह हो गई। सब कुछ लुट गया। फिर से जिंदगी और रोजी रोटी की चुनौती सामने है।

उन्होंने बताया जलीं दुकानें देखने पर पता चला कि वहां से एक बाइक गायब है। आग लगने के बाद उसकी टंकी तक नहीं मिली। बाद में पता चला कि यह बाइक एक मैकेनिक के पास है जो उनके कारोबार से जुड़ा है। कुछ अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी सामने आई हैं। इनसे आसपास के परिचितों के दंगे में शामिल होने का शक गहरा गया है।

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