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सुप्रीम कोर्ट से खफा गांगुली बोले, मैं जेल जाने को तैयार

Wed, 08 Jan 2014 07:39 PM IST
एजेंसी/कोलकाता
एजेंसी/कोलकाता Updated Wed, 08 Jan 2014 07:39 PM IST
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ganguly slams supreme court alleges he was badly treated

लॉ इंटर्न के यौन उत्पीड़न मामले में पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले जस्टिस एके गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा है कि शीर्ष अदालत ने उनके साथ बहुत बुरा किया।

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मामले की जांच करने के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट के पैनल के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि परेशान होकर उन्होंने आयोग के अध्यक्ष का पद छोड़ा है।
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उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह अपनी छात्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने के बजाय जेल जाना पसंद करेंगे।

उन्होंने एक टेलीविजन न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके साथ बहुत बुरा और अनुचित व्यवहार किया। सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने उनको अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया। उन्होंने रिटायर जज के सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आने की दलील देते हुए पैनल की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया।
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जस्टिस गांगुली ने कहा कि इंटर्न ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट में शिकायत नहीं की, ऐसे में क्यों पैनल गठित किया गया। शीर्ष अदालत के अपने साथी जजों की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि पैनल ने बिना अधिकार के काम किया।

पैनल द्वारा घटना की रात जस्टिस गांगुली के व्यहार को अनुचित करार दिए जाने के बारे में उन्होंने पूछा कि किसके प्रति उनका व्यवहार अनुचित था। उन्होंने छात्रा को अपने साथ रुकने के लिए मजबूर नहीं किया था। न ही उन्होंने उस पर शराब पीन का दबाव डाला था।

उन्होंने कहा कि अगर किसी की इच्छा न हो तो क्या वह उस पर शराब पीने का दबाव डाल सकते हैं। अगर छात्रा को यह पसंद नहीं था तो वह डिनर से पहले वहां से जा सकती थी।

उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने लॉ इंटर्न के बयान को गोपनीय करार देते हुए उन्हें उसकी प्रति देने से मना कर दिया। इन सभी बातों को लेकर उन्होंने प्रधान न्यायाधीश पी सतशिवम को एक विस्तृत पत्र लिखा था, लेकिन उन्हें इसका जवाब नहीं मिला।


जस्टिस गांगुली ने लॉ इंटर्न को शुभकामना देते हुए कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश नहीं रची गई। पश्चिम बंगाल की सरकार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनके कामकाज से असहज थी।

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