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जिया उल हक की रिपोर्ट पर राजा भैया को मिली राहत
पीयूष पांडेय
Updated Sun, 18 Aug 2013 12:29 AM IST
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इसे समय का चक्र ही कहेंगे कि जिस कुंडा डीएसपी की पत्नी ने अपने पति की हत्या के मामले में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को सीबीआई की ओर से क्लीन चिट दिए जाने का कड़ा विरोध किया।
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उसी दिवंगत पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पूर्व मंत्री के खिलाफ गैंगेस्टर मामले में दायर याचिका को वापस लेने की मंजूरी राज्य सरकार के आग्रह पर प्रदान कर दी।
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राजा भैया को जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तत्कालीन बसपा सरकार में दायर की गई इस याचिका को वापस लेने की मांग निजाम बदलने के बाद सपा सरकार में की गई, जिस पर शीर्षस्थ अदालत ने अपनी मंजूरी दी है।
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मायावती सरकार ने 2011 में इस मामले में शीर्षस्थ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इस गैंगेस्टर मामले की जांच कुंडा डीएसपी जिया उल हक ने की थी और उन्होंने अपनी रिपोर्ट में राजा भैया को क्लीन चिट दी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर सपा सरकार ने सर्वोच्च अदालत में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को वापस लिए जाने का आवेदन किया।
जस्टिस टीएस ठाकुर की पीठ ने अखिलेश यादव सरकार की ओर से दायर किए गए आवेदन में हक की उस रिपोर्ट पर जोर दिया है जिसमें राजा भैया को पाक-साफ करार दिया गया।
यह रिपोर्ट नवंबर, 2012 में डीएसपी ने तैयार की थी। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अरदेंदु मौलि कुमार प्रताप ने कहा कि कुंडा डीएसपी ने अपनी रिपोर्ट में सब कुछ स्पष्ट कर दिया है।
ऐसे में राजा भैया की जमानत के खिलाफ दायर याचिका को सरकार वापस लेने की मांग करती है। याद रहे कि यह रिपोर्ट शासन में पेश किए जाने के ठीक चार माह बाद मार्च, 2013 में डीएसपी हक को नाराज भीड़ ने मार दिया था।
इस आवेदन में हक के हस्ताक्षरित उस हलफनामे को भी शामिल किया गया है जो रिपोर्ट के सही होने की तस्दीक के लिए संबंध में हैं और जिस पर हक ने मौत से करीब एक माह पहले हस्ताक्षर किए होंगे।
गौरतलब है कि मायावती सरकार ने राजा भैया के खिलाफ 2010 में पंचायत चुनाव के दौरान बसपा उम्मीदवार पर हुए जानलेवा हमला मामले में गैंगेस्टर अधिनियम लगाया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्दलीय विधायक को इस मामले में अप्रैल, 2011 में जमानत दे दी थी। इस आदेश के खिलाफ बसपा सरकार ने तत्काल जमानत खारिज करने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की थी, जिस पर अदालत ने नोटिस भी जारी कर दिया था।
लेकिन सरकार बदलने के बाद याचिका वापस लेने की मांग कर दी गई।