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यहां जलती चिताओं पर खाते हैं बदला लेने की कसम

Wed, 25 Feb 2015 08:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Wed, 25 Feb 2015 08:35 AM IST
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gang war in west up.

चाहे मुजफ्फरनगर हो या मुरादाबाद...कचहरी में गोलियां तड़तड़ाने के पीछे मूल वजह थी दुश्मनी। बदले की रंजिश से वेस्ट यूपी की जमीन लगातार लाल हो रही है। मुरादाबाद में अब तक पचास से ज्यादा हत्याएं बदला लेने की नीयत से एक के बाद एक की गई हैं तो पश्चिमी यूपी में यह आंकड़ा पांच सौ के पार चला जाता है।

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किसी ने भाई के चिता पर हाथ रखकर हत्यारे को मौत के घाट उतारने की कसम खाई तो किसी ने पिता की। पुलिस दुश्मनी से उपजे इस गैंगवार के खतरे को महसूस तो करती है लेकिन कभी समझौते की कोशिश नहीं करती। मौजूदा दौर में भी तमाम परिवारों में खूनी रंजिश जारी है जो कभी भी बड़े गैंगवार का रूप ले सकती है।
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दुश्मनी नंबर एक:

4 मार्च 2013 को छात्र नेता रिंकू चौधरी की हत्या कर दी गई थी। कत्ल के इस मामले में ब्लाक प्रमुख योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा का नाम आया उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। 23 फरवरी 2015 को भूरा की कचहरी में हत्या कर दी गई। हत्या भी रिंकू चौधरी के भाई सुमित ने अपने साथियों के साथ मिलकर की। बताते हैं सुमित ने रिंकू की जलती चिता पर बदला लेने की कसम खाई थी। सोमवार को जब उसने हत्या की तो इस बात को कहा भी था।
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दुश्मनी नंबर दो:

27 अप्रैल 2011 में डबल फाटक दस सराय में सभासद राजेश सैनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह कत्ल भी वर्चस्व को लेकर हुआ। इस हत्या में यहीं के रहने वाले हिंदू नेता ध्यान सिंह सैनी को भी नामजद किया गया था। 10 अप्रैल 2014 को ध्यान सिंह सैनी को गोली मारी गई और 18 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। इस मामले में राजेश सैनी के भाइयों को नामजद किया गया था। अभी तक दोनों पक्षों में रंजिश चली आ रही है। हालांकि समझौते के प्रयास कई दफा हुए। 

दुश्मनी नंबर तीन:

gang war in west up.

अहरोला माफी गांव में 1984 में मुनव्वर हुसैन की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इसके एक साल के बाद आरोपी अब्दुल हक को खुलेआम कत्ल  किया। अब्दुल हक की मौत का बदला मुनव्वर हुसैन गुट के देवेंद्र गुप्ता की हत्या करके लिया। तो देवेंद्र गुप्ता की मौत का बदला तालिब हुसैन की हत्या करके लिया गया। इसके बाद पंचायत चुनाव के दौरान रईस आलम और उसके भतीजे बब्बू पुत्र मुजफ्फर हुसैन की मतदान केंद्र के अंदर घुस कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

दुश्मनी नंबर चार:

सेंदरी गांव में दो गुटों के बीच खूनी रंजिश है। दुश्मनी प्रेमराज सिंह की हत्या से शुरू हुई थी इसके बाद उसके बेटे वीर सिंह की हत्या भरी पंचायत में कर दी गई। वीर सिंह के बेटे और शातिर बदमाश कुंवरपाल सिंह ने अपने पिता की मौत का बदला पूर्व प्रधान कमल सिंह की हत्या भरे बाजार करके लिया। कुंवर पाल सिंह अब तक फरार है। दुश्मनी अभी भी जिंदा है।  

दुश्मनी नंबर पांच:
अगवानपुर के मब्बन पक्ष और यासीन उर्फ मिल्की गुटों में खूनी रंजिश थी। वर्ष 1982 में मब्बन के बेटे भूरा को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डाला। भूरा के कफन पर खाई गई कसम पर मब्बन पक्ष ने 1987 में मिल्की यासीन को दिन दहाड़े गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद बदले की उसी कसम में मब्बन के दूसरे बेटे कलवा को 1989 में अगवानपुर रेलवे क्रासिंग पर मार डाला। इसके बाद 1993 को मब्बन के पोते बाबू पुत्र भूरे को मुरादाबाद में गोली मार कर मौत के घाट उतार डाला। इसके बाद 16 मार्च 1995 को शुक्र बाजार में मिल्की यासीन के बेटे मिल्की सुलेमान की दिनदहाड़े चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी थी। इसी बीच कुछ  घंटों के बाद ही सुलेमान की हत्या में शामिल सुपारी किलर कमर व काले मारे गए। खूनी रंजिश में सात लोगों की जान जा चुकी है। हर हत्या के बाद दोनों गुट में समझौता होता था लेकिन हर बार समझौता टूट जाता था। अब भी दोनों पक्षों में बोलचाल नहीं है।

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