दिल्ली गैंगरेप: सस्ते में छूट जाएगा छठा दरिंदा

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 29 Jan 2013 12:45 AM IST
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gang rape case sixth accused declared minor

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दिल्ली गैंगरेप का सबसे खूंखार आरोपी सस्ते में छूट जाएगा, क्योंकि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजे बोर्ड) ने उसे नाबालिग मान लिया है। अब उसे अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है। यह अवधि भी उसे जेल में नहीं, बल्कि बाल सुधार गृह और स्पेशल होम में काटने होंगे।
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बोर्ड ने यह फैसला आरोपी के स्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर लिया है। साथ ही बोर्ड ने दिल्ली पुलिस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें आरोपी की सही उम्र का पता लगाने के लिए बोन टेस्ट कराने की मांग की गई थी। बोर्ड के इस फैसले से पुलिस नाखुश है।


उसके वकील ने कहा है कि पुलिस के पास बोर्ड के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का विकल्प खुला है। पीड़िता का परिवार भी बोर्ड के फैसले को चुनौती देने पर विचार कर रहा है। पीड़िता के भाई ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा है कि वे छठे आरोपी के लिए फांसी से कम सजा स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रमुख दंडाधिकारी गीतांजलि गोयल की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सोमवार को दिल्ली गैंगरेप के छठे आरोपी को नाबालिग करार दिया।

खंडपीठ ने यह फैसला उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के उस स्कूल के रिकॉर्ड के आधार पर लिया, जहां आरोपी कक्षा दो में पढ़ा था। स्कूल के मौजूदा और पूर्व हेडमास्टर 15 जनवरी को बोर्ड के समक्ष पेश हुए थे और कहा था कि स्कूल रिक़ॉर्ड के अनुसार आरोपी की जन्मतिथि 4 जून, 1995 है। उन्होंने नाबालिग आरोपी के आयु के संबंध में स्कूल का दाखिला रजिस्टर पेश किया था।

नाबालिग करार दिए जाने के बाद यह तय है कि इस आरोपी के खिलाफ मामला जेजे बोर्ड में चलेगा। वैसे इसके ऊपर वही आरोप लगाए हैं, जो मामले के पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए हैं। पांच अन्य आरोपियों राम सिंह, मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, गैंगरेप, हत्या के प्रयास, अपहरण, अप्राकृतिक अपराध, डकैती, लूट के दौरान चोट पहुंचाना, सुबूत नष्ट करना, आपराधिक साजिश और समान इरादे के आरोप लगाए गए हैं। गौरतलब है कि 16 दिसंबर को 23 वर्षीय युवती से चलती बस में गैंगरेप किया गया था। 29 दिसंबर को पीड़िता ने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

कितनी हो सकती है सजा

मामले की सुनवाई के दौरान जुवेनाइल आरोपी को बाल सुधार गृह में रखा जाएगा। बालिग होने पर उसे स्पेशल होम में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जुवेनाइल के बालिग हो जाने के बाद उसे जेल भेजे जाने का प्रावधान नहीं है। अगर जुवेनाइल जिस्टस बोर्ड आरोपी को गैंगरेप मामले में दोषी ठहराता है तो उसे जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट की धारा 15(जी) और 16 के के तहत अधिकतम तीन साल की सजा हो सकती है।  

कैसे माना नाबालिग

नाबालिग आरोपी को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के भवानीपुर के उस स्कूल के सर्टिफिकेट के आधार पर जुवेनाइल करार दिया गया है, जहां वह कक्षा 2 तक पढ़ा था। स्कूल के प्रिंसिपल ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष 15 जनवरी को कहा था कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार अपराध वाले दिन उक्त आरोपी की उम्र 17 साल 6 माह 12 दिन थी।  बोर्ड के समक्ष स्कूल के पूर्व हेडमास्टर भी पेश हुए थे। दोनों ने कहा था कि वे अपने स्कूल के उस पुराने छात्र को पहचान नहीं सकते, लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार उसने 2002 में उनके स्कूल में एडमीशन लिया था। पूर्व हेडमास्टर ने बताया कि एडमीशन के समय उस लड़के को उसके पिता लेकर आए थे। तब उन्होंने उसकी उम्र 4 जून, 1995 बताया था।    

बोन टेस्ट कराना चाहती है पुलिस

दिल्ली गैंगरेप के नाबालिग आरोपी की उम्र को लेकर शुरू से ही विवाद चल रहा है। इस आरोपी की सही उम्र का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस उसका बोन टेस्ट कराना चाहती है, लेकिन जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने इसे अस्वीकार कर दिया है। बोर्ड ने आरोपी को उसके स्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर नाबालिग करार दे दिया है। बहरहाल, अभियोजन पक्ष के वकीलों का कहना है कि वे बोर्ड के इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।

बोर्ड ने स्कूल के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी को नाबालिग माना है, जबकि पुलिस ने आरोपी का बोन टेस्ट करा कर सही उम्र का पता लगाने की अर्जी दी थी। बहरहाल, पुलिस के पास सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक जाने का अधिकार है। -राजेश तिवारी, अधिवक्ता, अभियोजन पक्ष

सरकारी स्कूल का रिकॉर्ड एक प्राथमिक साक्ष्य है। इसके न होने पर दूसरे साक्ष्यों की जरूरत होती है। कानूनी प्रक्रिया में सबसे पहले प्राथमिक साक्ष्यों को तरजीह दी जाती है। दूसरे साक्ष्यों को बाद में परखा जाता है। ऐसे में इसकी गुंजाइश काफी कम है कि ऊपरी अदालत जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के फैसले को बदलेगी। -- राजेश आनंद, अधिवक्ता, बचाव पक्ष

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