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छंटने लगेंगे गडकरी की ताजपोशी पर संशय के बादल
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Mon, 17 Dec 2012 08:01 AM IST
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गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव नतीजे आते ही भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर छाए संशय के बादल भी छंटने लगेंगे। ये नतीजे नितिन गडकरी के भविष्य तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इधर, भाजपा के भीतर से ही गडकरी के पक्ष में ही सुर सुनाई देने लगे हैं। भाजपा ने अब संगठन के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराने की अवधि एक माह और बढ़ा दी है, अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव दिसंबर की बजाए जनवरी तक होगा।
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संसद का शीतकालीन सत्र भी इसी सप्ताह खत्म हो रहा है। गुजरात व हिमाचल प्रदेश विधानसभा के चुनाव नतीजे भी इसी हफ्ते आएंगे। माना जा रहा है कि यदि नतीजे भाजपा के पक्ष में आते हैं तो गडकरी की राह आसान हो जाएगी, लेकिन नतीजे पार्टी की उम्मीद के खिलाफ आने पर उनकी दोबारा ताजपोशी की राह और कठिन हो सकती है।
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यह भी कहा जा रहा है कि गुजरात में नरेंद्र मोदी के फिर से सत्ता में आने पर वह पहले से ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे और इससे भी गडकरी के लिए मुश्किल हो सकती है। गडकरी से मोदी आज भी संजय जोशी प्रकरण को लेकर नाराज हैं। गडकरी ने ही जोशी को उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसलिए जब राम जेठमलानी ने गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोला तो शक की सुई मोदी पर चली गई।
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सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब भी गडकरी के पक्ष में हैं, जबकि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का खेमा गडकरी की दोबारा ताजपोशी के खिलाफ है। इधर, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी साफ कह चुके हैं कि गडकरी की दोबारा ताजपोशी में कोई मुश्किल नहीं है।
इसी तरह पार्टी उपाध्यक्ष विनय कटियार भी गडकरी के पक्ष में खुल कर बोल चुके हैं। माना जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल के चुनाव भाजपा के पक्ष में आने पर पार्टी के भीतर से गडकरी के समर्थन में और सुर सुनाई दे सकते हैं।