पवार की सांठगांठ से गडकरी ने हड़पी किसानों की जमीन
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विदर्भ के उन्मेद तालुका के घुरसापुर ग्राम का उदाहरण देते हुए केजरीवाल ने कहा कि वहां के किसानों की 48 हेक्टेयर जमीन (120 एकड़) को महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के हितों को नजरअंदाज करते हुए नितिन गडकरी को दे दी। इन इलाकों के गांवों में बांध बनाने को लेकर सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था। हालांकि बांध तैयार हो जाने के बाद काफी जमीन बच गई थी जिसका बड़ा हिस्सा गडकरी की संस्था को दे दिया गया।
केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि खुद गडकरी ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन की कार्यकर्ता अंजलि दमानिया से कहा था कि उनके पवार से अच्छे रिश्ते हैं और सिंचाई घोटाला पर वे कुछ नहीं बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के बहुचर्चित सिंचाई घोटाला पर पवार और गडकरी चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? 2005 में निजी हित के लिए नितिन गडकरी ने राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार को चिट्ठी लिखी थी।
केजरीवाल ने कहा कि सच तो यह है कि गडकरी राजनेता के अलावा बड़े कारोबारी हैं। महाराष्ट्र में जो किसानों के लिए बांध बनाए गए उसका पानी गडकरी की कंपनी के लिए उपयोग हो रहा है। यह कहानी केवल एक गांव की नहीं है बल्कि पूरे महाराष्ट्र की है।
विदर्भ में किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए केंद्र सरकार जो फंड भेजती है उसे कुछ लोग बीच में गायब कर रहे हैं। यहां तक जो विदर्भ इलाके में जो बांध बनाए गए हैं उनमें कई में नहर भी नहीं है। बांध का सारा पानी गडकरी की जमीन के लिए उपयोग किया जा रहा है।