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चंद्रयान-दो मिशन पर न लगाएं वित्तीय संकट का ग्रहण

Mon, 14 Sep 2015 08:43 AM IST
Updated Mon, 14 Sep 2015 08:43 AM IST
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fund becoming hurdle for Chandrayan II mission

अंतरिक्ष कार्यक्रम के महात्वाकांक्षी अभियान चंद्रयान- दो के लिए बजट कटौती में संसदीय समिति ने सवाल खड़े किए हैं। समिति ने कहा है कि विश्व में देश के गौरव और मान को बढ़ाने वाले इस मिशन में वित्तीय संकट का ग्रहण नहीं लगना चाहिए।

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अंतरिक्ष विभाग इस महत्वपूर्ण मिशन में जुटा हुआ है और भारत के दूसरे चंद्र मिशन के परिक्रमा लैंडर रोवर को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की कोशिशें तेज हैं। अंतरिक्ष विभाग के अनुसार यह पूर्णत: स्वदेशी मिशन है जो चंद्रमा के सतह पर एक परिभ्रमक को उतारने और उसकी गति नियंत्रित करने की क्षमता साबित करेगा।
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इससे चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास में के बारे में और जानकारियां जुटाई जा सकेंगी। चंद्र नमूनों का विश्लेषण भी इस मिशन का उद्देश्य है। इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम लगातार काम कर रही है। अंतरिक्ष विभाग से संबंधित संसदीय समिति ने मिशन की समीक्षा करते हुए इसके बजटीय प्रावधान में कटौती पर चिंता जताई है।
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समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि 2014-15 में मिशन के संशोधित बजट आकलन के आवंटन में कटौती हुई। इसके अलावा 2015-16 में बजट आकलन स्टेज पर पिछले साल की तुलना में 20 करोड़ की कटौती हुई है।

समिति ने सिफारिश में कहा है कि फंड का अभाव मिशन को पूर्ण करने में अड़चनें पैदा करे, इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।

फंड की कमी नहीं होनी चाहिए

fund becoming hurdle for Chandrayan II mission

चंद्रयान-दो का अरबिटर, लैंडर और रोवर के लिए उपकरण चयनित कर लिया गया है और वर्तमान में यह विकास के विभिन्न चरणों में है। रोवर के इंजीनियरिंग माडल को बना लिया गया है।

मिशन के प्रोफाइल और प्रक्षेपण की रणनीति तैयार है। लैंडर माडयूल के लिए उच्च तकनीक विकसित किया जाना है जिसकी प्रक्रिया चल रही है। 2013-14 में मिशन के लिए 78 करोड़ था जो संशोधित किए जाने के बाद घटकर 24 करोड़ हो गया और वास्तव में 23 करोड़ 99 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके।

इसी तरह 2014-15 में बजट 80 करोड़ का बजट आकलन संशोधित किए जाने के बाद घटकर 37 करोड़ 60 लाख का हुआ और वास्तविक खर्च 35 करोड़ 67 लाख रुपये पर सिमट गया। अब 2015-16 के लिए बजट आकलन ही 40 करोड़ रुपये का है जो दो साल के पहले के आकलन से 38 करोड़ कम है।

चंद्रयान का पहला मिशन इसरो और सोवियत संघ के रसियन स्पेस एजेंसी का संयुक्त कार्यक्रम था। दूसरा मिशन इस क्षेत्र में भारतीय उपलब्धियों का प्रतीक है। इस स्वदेशी मिशन के चंद्रयान -दो को जीएसएलवी मार्क दो से प्रक्षेपित किया जाना है।

संसदीय समिति ने कहा है कि इस गौरवशाली प्रोजेक्ट में फंड की कमी नहीं होनी चाहिए।

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