फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   frisking of women by male jawans at nepal border.

यहां पुरुष क्यों लेते हैं महिलाओं की तलाशी?

Sat, 07 Mar 2015 08:25 PM IST
बृजकुमार यादव/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम
बृजकुमार यादव/बीबीसी हिंदी डॉट कॉम Updated Sat, 07 Mar 2015 08:25 PM IST
विज्ञापन
frisking of women by male jawans at nepal border.

नेपाल और भारत सीमा चौकियों पर कोई महिला सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं है, जिसके कारण वहां महिलाओं की जांच भी पुरुष सुरक्षाकर्मी करते हैं। लेकिन जब मंजु सिंह सीमा चौकी से होकर गुजरीं और नेपाल सशस्त्र सीमा बल के जवावों ने उनसे जांच कराने को कहा तो वो भड़क गईं।

विज्ञापन


उन्होंने कहा, “मेरी जांच आप कैसे करेंगे।” मंजु जब कुछ देर तक अपनी बात पर कायम रहीं तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें जाने दिया। लेकिन बहुत सी महिलाएं चुप रहती हैं और पुरुष सुरक्षाकर्मी ही उनकी जांच करते हैं।
विज्ञापन


यह समस्या सिर्फ नेपाली सीमा चौकियों पर नहीं, बल्कि भारतीय सीमा चौकियों पर भी है। भारत की ओर से तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की पोस्ट में भी महिला सुरक्षाकर्मी नही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

'वे छूते हैं तो बहुत खराब लगता है'

frisking of women by male jawans at nepal border.

नेपाल और भारत के बीच 1600 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिससे दोनों देशों के नागरिक बेरोकटोक एक दूसरे के यहां आ जा सकते हैं। लेकिन सीमा पर महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती ना होने से दोनों देशों की महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है।

एक महिला रीता देवी कामत कहती हैं, “पुरुष सुरक्षाकर्मियों के जांच करने का तरीका ठीक नहीं है। वे हमें छूते हैं तो बहुत खराब लगता है। कई बार तो सुरक्षाकर्मी और आम लोगों के बीच इस बात पर कहासुनी भी होती है।”

सीमा पर कहीं थाना है तो कहीं सुरक्षा चौकियां। एक सीमा चौकी पर 10 से 40 पुलिसकर्मी तक रहते हैं। सीमा पर भारतीय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की एक चौकी में 20 से ज्यादा जवान रहते हैं जो सीमा पर आने-जाने वालों की जांच करते है।

रहने की व्यवस्था नहीं

frisking of women by male jawans at nepal border.

नेपाल के धनुषा ज‌िले में पुलिस एसपी गणेश बहादुर थापा मानते हैं, ''सीमा पर महिला सुरक्षाकर्मी की तैनाती बहुत जरूरी है। लेकिन वहां महिला सुरक्षाकर्मी के रहने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे महिला कर्मी को वहां नहीं रखा गया है।''

वहीं भारत के मधुबनी ज‌िला में पिपरौन सीमा चौकी पर तैनात एसएसबी के इंस्पेक्टर बीआर तंवर कहते हैं, “हमारी बटालियन में तो बहुत सी महिलाएं हैं लेकिन उन्हें सीमा पर तैनात करने की व्यवस्था नहीं है। एक दो महिला कॉन्सटेबलों को रखने के लिए अलग से घर और सुरक्षा के प्रबंध करने पड़ेंगे।”

महिला कॉन्सटेबल ना होने से सीमा चौकियां महिलाओं के लिए सहज नहीं हो पा रही हैं। दूसरी तरफ कई महिलाएं भी सीमा पर ड्रग, सोना और चादी जैसी बहुमूल्य वस्तुओं की तस्करी में शामिल पाई जाती हैं।

इस बात को पुलिस भी मानती है, लेकिन महिला सुरक्षाकर्मियों के न होने की वजह से महिलाओं की जांच का काम ठीक से नहीं हो पाता है। यह पुलिस के लिए भी सिर दर्द बना हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed