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'न्यायपालिका की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं'

Sat, 13 Sep 2014 08:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 13 Sep 2014 08:04 PM IST
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freedom of judicary is so important for us.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) आरएम लोढ़ा ने शनिवार को जोर देते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता है और उसके पास किसी भी तरह के हस्तक्षेप को नाकाम करने की शक्ति भी है।

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जस्टिस लोढ़ा का यह बयान उच्च न्यायिक पदों पर नियुक्तियों के लिए कोलेजियम सिस्टम को खत्म करने को उठाए गए कदमों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में संसद से पारित  कानून का सीधे जिक्र नहीं किया लेकिन यह जरूर कहा कि न्यायपालिका की आजादी को छीनने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा।
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जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायिक स्वतंत्रता जरूरी है। यह एक ऐसी संस्था है, जो कार्यपालिका या किसी और की ओर से किए गए गलत कार्यों के मामले में उनकी मदद करती है।
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उन्होंने कहा कि मेरा अभिप्राय संसद से पारित बिलों पर बहस का नहीं है, बल्कि सिर्फ न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। 27 सितंबर को सीजेआई के पद से रिटायर हो रहे जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि वह पिछले दो दशकों से भी ज्यादा वक्त से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज हैं। इसलिए वह पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि न्यायपालिका के पास वह शक्ति है, जिससे उसकी आजादी छीनने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि लोगों को पता है कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक ऐसा अंग है, जिसकी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। न्यायपालिका से जुड़ा हर व्यक्ति इसकी आजादी को किसी भी कीमत पर कायम रखेगा। इसी स्वतंत्रता के चलते लोगों में विश्वास है कि यदि कोई कार्यकारी गलत करता है तो न्यायपालिका उनकी सहायता करेगी और उबार लेगी।

जस्टिस लोढ़ा बार एसोसिएशन आफ इंडिया (बीएई) की ओर से आयोजित रूल ऑफ लॉ कनवेंशन 2014 विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर कहा कि संपन्न लोकतंत्र में यह एक बुरा रोग है। जब अर्थव्यवस्था और उद्योग बढ़ता है तो भ्रष्टाचार भी बढ़ता है। बढ़ते भ्रष्टाचार में यह बहुत जरूरी है कि न्यायपालिका को भ्रष्टाचार से मुक्त रखा जाए। उन्होंने कहा कि हम विश्वास है कि न्यायपालिका में हर तरह के भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंका जाएगा।


न्यायपालिका की आजादी पवित्र और रक्षणीय है : रविशंकर प्रसाद
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि सरकार के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता पवित्र और रक्षणीय है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसाद ने कहा कि मौजूदा सरकार में कई मंत्रियों ने आपातकाल के दौरान व्यक्तिगत आजादी, मीडिया की आजादी और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था।

ऐसे में हमें न्यायपालिका की आजादी का महत्व भलीभांति मालूम है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार न्यायपालिका के प्रति उच्च सम्मान का भाव रखती है।

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