फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Freedom means not only

आजादी के मायने अब केवल 'आजादी' नहीं बल्कि चाहिए 'खुलापन'

Sat, 15 Aug 2015 01:56 AM IST
अमर उजाला नेटवर्क /नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क /नई दिल्ली Updated Sat, 15 Aug 2015 01:56 AM IST
विज्ञापन
Freedom means not only

देश जब आजाद हुआ था तब आजादी एक मिशन थी, लेकिन आज 68 साल बाद भारत में युवाओं की तीसरी पीढ़ी तैयार हो चुकी है। इस पीढ़ी के लिए आजादी का मतलब संवैधानिक परिभाषा नहीं, बल्कि रूढ़िवाद में जकड़े परिवार, समाज और राष्ट्र से खुलेपन की अपेक्षा है।

विज्ञापन


अब आजादी का मतलब है घरों में बेटी के जन्म पर उत्सव, बंधन मुक्त इंटरनेट, खुलेपन वाली लाइफ स्टाइल और ब्रॉड सोच। अमर उजाला ने इस संबंध में राजनीति, बॉलीवुड, खेल और प्रतियोगी परीक्षा टॉपरों से बात की तो सभी ने स्वीकार किया कि अब पुरानी सोच से काम नहीं चलेगा।
विज्ञापन


आजादी के बाद वाली दो पीढ़ियों ने कुर्बानियां देने के बाद घर और समाज में बहुत कुछ बर्दाश्त किया है, अब उनसे उबरने की बारी है। बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट सहित कई युवा बेटियों ने सवाल उठाया कि बेटियों के जन्म पर आजादी के 68 साल बाद भी घरों में उत्सव नहीं मनाया जाता, ऐसा क्यों ?
विज्ञापन
विज्ञापन

सेनानियों पर हो अलग किताब प्रकाशित

Freedom means not only

मैगसेसे पुरस्कार विजेता अंशु गुप्ता ने कहा कि पुराने तौर तरीके छोड़ने के लिए अब सोच बदलनी होगी। बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि युवाओं को बड़े काम करने के लिए चाहिए कि वे अपने मन से डर को निकालें और खुद पर भरोसा रखें।

लंदन ऑलम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाले योगेश्वर दत्त सोनीपत में पहलवानों के साथ तिरंगा फहराएंगे, लेकिन खेद जताया कि नई पीढ़ी को देश के लिए कुर्बान होने वाले सेनानियों के बारे में कुछ मालूम नहीं है।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर एक अलग किताब प्रकाशित कर उसे आवश्यक रूप से पढ़ाने की अपील की है।

अभी चाहिए मूलभूत आजादी

Freedom means not only

बीजू जनता दल के सांसद जय पांडा का कहना है कि ‘युवाओं को मूलभूत आजादी अभी नहीं मिली है। देश में इंटरनेट की पहुंच बहुत सीमित है, इसे खुली सोच के साथ युवाओं तक पहुंचाना चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी युवाओं को आजादी की दरकार है।’

वहीं वर्ष 2015 में आईएएस परीक्षा टॉप करने वाली ईरा सिंघल की सोच बहुत साफ है  ‘लड़कियों को खुली हवा में सांस लेने का हक है, लेकिन आज भी वे घर की चारदीवारी में बंद हैं। अब खत्म होना चाहिए लड़कियों से भेदभाव वाला रूढ़िवादी नजरिया।’

फिल्म अभिनेत्री आलिया भट्ट महिलाओं की स्वतंत्रता की पक्षधर हैं और चाहती हैं कि बेटी के जन्म पर भी घरों में जश्न मनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि समाज में महिलाओं से होने वाला भेदभाव हर सूरत में खत्म होना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed