गरीबों को महंगी मेडिकल जांच से मिल सकती है राहत
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देश के गरीब परिवारों के लिए खुशखबरी है। संभव है कि जल्द ही उन्हें केंद्र सरकार के अस्पतालों में मुफ्त दवाओं के साथ मुफ्त जांच की सुविधा भी मिल सकती है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निर्देश के बाद मंत्रालय ने इस पर विचार करना शुरू कर दिया है।
सरकार पर सबसे पहला हक गरीबों का होने के पीएम नरेंद्र मोदी के संसद में दिए बयान के अनुरूप गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने की योजना की शुरुआत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से होगी।
इसके बाद दिल्ली समेत छह राज्यों में खुले एम्स में भी इसे लागू करने पर विचार किया जाएगा।
महंगी जांच से मिलेगी राहत!
स्वास्थ्य मंत्री ने शुक्रवार को गरीबों से एमआरआई और सीटी स्कैन जांच की फीस नहीं वसूले जाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि गरीब मरीज ऐसी सुविधाओं के लाभ पाने के हकदार हैं।
मेडिकल जांचों को उनके उपचार का एक भाग माना जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के इस रुख के बाद मंत्रालय ने डायरेक्टर जनरल और हेल्थ सविर्सेज (डीजीएचएस) को गरीबों के मुफ्त जांच की सुविधा को लेकर नीति तैयार करने और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस प्रस्ताव की समीक्षा करने को कहा है।
पायलट स्तर पर इसकी शुरूआत सफदरजंग अस्पताल से होगी। बाद में इसे सभी केंद्रीय अस्पतालों के लिए लागू किया जा सकता है।
सफदरजंग अस्पताल से होगी शुरूआत
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों के लिए सफदरजंग अस्पताल में सुविधा शुरू करने से सरकार पर विशेष आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा।
अगर अस्पताल में गरीबों से जांच शुल्क नहीं लिया जाए तो सालाना करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। इस बोझ को उठाने में केंद्र सरकार को दिक्कत नहीं आएगी।
माना जा रहा है कि छह नए एम्स में भी इस तरह की सुविधा शुरू होगी। अधिकारियों की मानें तो गरीबों को ध्यान में रखकर तैयार हो रही इस नीति को अगले तीन से छह महीने में अमलीजामा पहनाया जा सकता है।