फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   fraud in selling of baba vishwanath prasad.

बाबा विश्वनाथ का प्रसाद बेचने में फर्जीवाड़ा

Mon, 30 Mar 2015 10:20 AM IST
अनूप ओझा/अमर उजाला, वाराणसी
अनूप ओझा/अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 30 Mar 2015 10:20 AM IST
विज्ञापन
fraud in selling of baba vishwanath prasad.

बाबा काशी विश्वनाथ के भक्तों के साथ ऑनलाइन प्रसाद देने नाम पर वेबसाइट ‘आईभक्ति’ फर्जीवाड़ा कर रही है। इसी माह 14 तारीख को मुख्यमंत्री के हाथों इस साइट की लांचिंग कराई गई है। यह प्रसाद कहां बनवाया जा रहा है, कहां चढ़ाया जा रहा है, मंदिर न्यास परिषद को इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है। खास बात यह कि ये गोलमाल फिल्म अभिनेता डिनो मोरिया और उनके साथी की कंपनी डीओटी ई-सॉल्यूशन प्रा. लि. संस्था के जरिये साइट बनाकर किया जा रहा है।

विज्ञापन


डिनो मोरिया का दावा है कि मंदिर प्रशासन से बाकायदा करार हुआ है। मुख्य सचिव धर्मार्थ कार्य नवनीत सहगल भी उनकी बात का समर्थन कर रहे हैं। मगर मंदिर न्यास परिषद अध्यक्ष इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव मंजूर होना तो दूर, न्यास परिषद में इसे कभी चर्चा के लिए भी पेश नहीं किया गया। जबकि, ऑनलाइन प्रसाद की बिक्री धड़ल्ले से शुरू कर दी गई है।
विज्ञापन


सूबे के धर्मार्थ कार्य मंत्री विजय मिश्र ने भी ऐसी जानकारी से इनकार किया है। वैसे, खबर को लेकर की गई खोजबीन के बाद न्यास परिषद से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया है। उच्च स्तर पर पूरे मामले को संभालने की कवायद भी शुरू हो गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

550 रुपए में बेचा जा रहा प्रसाद के रूप में पेड़ा

fraud in selling of baba vishwanath prasad.

खीरा इंडस्ट्रियल इस्टेट, एसटी रोड सांताक्रूज मुंबई के पते से संचालित ‘आईभक्ति’ वेबसाइट के जरिये अब तक दो सौ से अधिक भक्तों को प्रसाद बेचा जा चुका है। दूसरे वेब पेज पर धुआंधार प्रचार भी किया जा रहा है। आईभक्ति वेबसाइट पर बाबा का प्रसाद लाल पेड़ा के रूप में 550 रुपए में बेचा जा रहा है। इसी कीमत पर प्रसाद के रूप में यह कंपनी ड्राई फ्रूट भी दे रही है।

इस वेबसाइट पर भविष्य में बाबा की ऑनलाइन आरती और पूजा कराने की भी घोषणा की गई है। इतना ही नहीं वेबसाइट पर एक वीडियो भी अपलोड किया गया है। इस वीडियो में मंदिर के एक अर्चक को यह कहते दिखाया गया है कि ‘आईभक्ति की’ यह योजना न्यास परिषद की सहमति से तैयार की गई है और इसका लाभ भक्तों को मिल सकेगा। उधर, न्यास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एके अवस्थी ने बताया कि ‘आईभक्ति’ की लखनऊ में लांचिंग के बारे में उन्होंने भी सुना है। सीएम से इसका उद्घाटन कराया गया है लेकिन अभी तक उनके पास इसके बारे में आधिकारिक निर्देश नहीं आया है।

डिनो मोरिया ने बताया कि अपर कार्यपालक पीएन द्विवेदी से मैं इस योजना को लेकर मिला था। उनसे चर्चा के बाद ही मैंने इस वेबसाइट की लांचिंग कराई। इसमें मेरी ओर से कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया है। हमलोग तो इससे ऐसे भक्तों की सेवा कर रहे हैं जो बाबा के दरबार तक पहुंच नहीं पाते।

मोरिया और नवनीत सहगल के दावे

fraud in selling of baba vishwanath prasad.

ट्रस्ट की बैठक में इसका निर्णय हुआ था और सरकार के अनुमोदन के बाद ही वेबसाइट लांच हुई है। इसमें किसी तरह की कोई अनियमितता नहीं है।- नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव, धर्मार्थ कार्य

दावे यहां खारिज
डिनो मोरिया से एक बार मेरी मुलाकात हुई है। आईभक्ति वेबसाइट के बारे में मुझे कुछ पता नहीं है। लखनऊ में सीएम ने जब उद्घाटन किया तब अखबारों के जरिये मुझे पता चला। न्यास परिषद या मुख्य कार्यपालक समिति में इस योजना से संबंधित प्रस्ताव कभी नहीं लाया गया है। पता चला है कि इस वेबसाइट पर प्रसाद बेचने का काम शुरू कर दिया गया है लेकिन मंदिर प्रशासन के पास अभी तक इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। प्रसाद के डिब्बे का एक नमूना जरूर मंगाया गया है ताकि उसे मुख्य कार्यपालक समिति के समक्ष रखा जा सके। -पीएन द्विवेदी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी

डिनो को पहचानता नहीं, सहगल भी गलत
मुझसे डिनो मोरिया से कभी न बात हुई है न मुलाकात। सामने आने पर वे मुझे पहचान भी नहीं सकते। आईभक्ति वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन प्रसाद बेचने की योजना से संबंधित प्रस्ताव न्यास परिषद के समक्ष कभी चर्चा के लिए लाया ही नहीं गया है। इससे मैं अनजान हूं। दूसरे जो बात नवनीत सहगल जी कह रहे हैं वह गलतबयानी है। न्यास की किसी भी बैठक में इस तरह का प्रस्ताव पास नहीं हुआ। -आचार्य पं. अशोक द्विवेदी, अध्यक्ष-काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद।  

धर्मार्थ कार्य मंत्री को कुछ पता नहीं
मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। मंदिर से जुड़े फैसले न्यास परिषद के स्तर पर भी लिए जाते हैं। इसके लिए शासन स्तर पर अनुमति लेना जरूरी नहीं। -विजय मिश्र, धर्मार्थ कार्य मंत्री

मंदिर में प्रसाद बनाने की कोई व्यवस्था नहीं : महंत

fraud in selling of baba vishwanath prasad.

‘जो व्यक्ति विश्वनाथ के दरबार में संकल्प लेकर जिस निमित्त पूजा करता है और बाबा को चढ़ाता है, वही बाबा का प्रसाद है। मंदिर में रसीद कटवा कर पूजा की जो थाली दी जाती है उसमें भी प्रसाद दिया जाता है। मंदिर में प्रसाद बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है। सुना जा रहा है कि मुंबई की किसी संस्था ने ऑनलाइन प्रसाद बेचने की जिम्मेदारी उठाई है लेकिन प्रसाद की यह प्रक्रिया ही गलत है। यह इंटरनेट के सहारे बाबा के नाम पर कमाई करने का बड़ा गोरखधंधा है।’ ये कहना है काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी का। वे कहते हैं कि न्यास परिषद का संविधान बाबा विश्वनाथ के प्रसाद के निमित्त इस तरह की किसी व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं देता है। जो हो रहा है, वह गलत है।

ऑनलाइन आरती की भी थी योजना
वेबसाइट निकट भविष्य में विश्वनाथ बाबा की ऑनलाइन आरती की सुविधा देने के बात भी कर रही है, लेकिन ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं है। हालांकि, मंदिर न्यास ने टाटा स्काई से आरती के प्रसारण के लिए करार किया है। टाटा स्काई के उपभोक्ता इस सुविधा का लाभ उठाते हैं। मंदिर के बाहर भी उसका प्रसारण होता है। आईभक्ति वेबसाइट पर सिद्धि विनायक मंदिर, अंबा जी मंदिर की ऑनलाइन पूजा कराने और प्रसाद बुक कराने जानकारी भी दी गई है। साथ ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और शिरडी के साईं मंदिर से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों को भी इस वेबसाइट पर जल्द ही ऑनलाइन करने की बात कही जा रही है।

देश के अन्य मंदिरों में व्यवस्था
शिरडी के साईं मंदिर ट्रस्ट ने ऑनलाइन प्रसाद वितरण और ऑनलाइन आरती की अपनी व्यवस्था की है। ट्रस्ट अपनी साइट के माध्यम से अपने द्वारा ही बनाए प्रसाद को बहुत कम शुल्क में बनाए गए अपने सदस्यों को प्रतिवर्ष भेजती है। आंध्र प्रदेश का बालाजी मंदिर ट्रस्ट भी इसी तरह की व्यवस्था चलाता है। इसके अलावा एक चैनल मां वैष्णो देवी मंदिर में सुबह होने वाली आरती टीवी पर प्रसारित करता है, जिसका लाभ नि:शुल्क कोई भक्त उठा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed