हाउसिंग लोन लेने वाले इस तरह की ठगी से रहें सावधान
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बरेली में क्राइम ब्रांच की इंटेलीजेंस विंग टीम ने कम ब्याज पर हाउस लोन का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सिविल लाइंस में एसएफसी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फर्जी कंपनी चलाने वाले इस गिरोह के शाहजहांपुर निवासी मुख्य आरोपी समेत तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
ये लोग अखबार में विज्ञापन देकर यूपी के अलावा उत्तराखंड और बिहार तक के तमाम लोगों को ठग चुके हैं। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी स्टांप पेपर, फर्जी वोटर आईडी, सात मोबाइल और 25 सिम आदि सामान बरामद किया है। कंपनी के आफिस को सील कर दिया गया है।
सिविल लाइंस की बिल्डिंग नंबर 216 में एसएफसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी गढ़िया रंगीन (शाहजहांपुर) के गांव करेमा निवासी विविद कुमार सिंह चला रहा था। विविद ही महज चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से हाउस लोन देने का विज्ञापन अखबारों में छपवाता था और लोगों से प्रोसेसिंग, सर्वे और दूसरे शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। इसी कंपनी के जरिये ठगे गए बिहार के थाना खगड़िया के गांधीनगर के वार्ड नंबर दो निवासी शिक्षक मंजुल प्रसाद ने एसएसपी धर्मवीर सिंह यादव से इसकी शिकायत की थी। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच की इंटेलीजेंस विंग के प्रभारी विकास सक्सेना, हरीश रावत, राम किशोर पटेल, रामेंद्र यादव को पड़ताल में लगाया।
टीम ने छानबीन की तो पता चला कि कंपनी पूरी तरह फर्जी है और हाउस लोन का विज्ञापन देकर लोगों को ठग रही है। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को फर्जी कंपनी के डायरेक्टर विविद कुमार सिंह, उसके सहयोगी सुमित और प्रेम कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से उत्तराखंड, बिहार से संबंधित फर्जी स्टांप पेपर, चेक बुक, फर्जी वोटर आईडी, दो लैपटॉप, सात मोबाइल, 25 सिम और पांच हजार रुपये कैश बरामद किया गया। तीनों आरोपियों को कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराकर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने हाउस लोन देने के नाम पर यूपी, उत्तराखंड और बिहार के कई लोगों से लाखों रुपये ठगे हैं। गैंग के दूसरे सदस्यों की भी तलाश की जा रही है। सिविल लाइंस स्थित कंपनी का दफ्तर सील कर दिया गया है।
ऐसे ठगे गए बिहार के मास्टर साहब
बिहार में रहने वाले शिक्षक मंजुल प्रसाद के मुताबिक बिहार के अखबारों में इस कंपनी का विज्ञापन पढ़कर उन्होंने उसमें दिए गए फोन नंबर पर संपर्क किया था। फोन रिसीव करने वाली कंपनी की कर्मचारी ने अपना नाम मीनाक्षी बताया। फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और दूसरे शुल्क जमा करते ही लोन हो जाएगा। उन्होंने 51 सौ रुपये फाइल चार्ज, 3100 रुपये सर्वे चार्ज और 32 हजार 584 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज के रूप में कंपनी के डायरेक्टर विविद सिंह को दिए।
इस दौरान विविद के साथ कंपनी का कर्मचारी सुमित गांधी निवासी डॉ.चौहान वाली गली सुभाषनगर और प्रेम कुमार गुप्ता निवासी सुभाषनगर भी था। मंजुल के मुताबिक इसके बावजूद उन्हें लोन नहीं मिला। विविद से संपर्क करने पर उसने कहा कि फाइल लेट हो गई है। अब उसे 30 हजार रुपये और देने होंगे। इस पर उन्होंने बरेली में कंपनी के आफिस पहुंचकर सुमित गांधी को 15 हजार और दिए। इसके बावजूद उन्हें लोन नहीं मिला।
धंधा ठगी का, रहन-सहन शाही
शाहजहांपुर के गढ़िया रंगीन कस्बे का रहने वाला ठगी का आरोपी विविद कुमार का रहन-सहन शाही है। वह ग्रीन पार्क में किराये के मंहगे आवास में रह रहा था। स्कार्पियो गाड़ी से चलता था और महंगी सिगरेट पीकर सामने वाले को प्रभावित करता था। उस पर थाना सुनगढ़ी (पीलीभीत) में भी ठगी के आरोप का मुकदमा दर्ज हुआ था। पांच साल पहले वह ग्रीन पार्क के पास कंपनी चलाता था। वह ग्रेजुएट है और एक निजी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल कोर्स कर रहा है।
पढ़ाई के साथ कमाई के चक्कर में फंसे सुमित और प्रेम
सुमित गांधी बीकॉम तृतीय और प्रेम कुमार बीए तृतीय में पढ़ता है। दोनों ने बताया कि पढ़ाई के साथ वह कुछ कमाई करने के लिए विविद की कंपनी में आए। उन्हें साढ़े तीन-तीन हजार रुपये की नौकरी दे दी गई। दोनों ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि कंपनी फर्जी है। वह तो नौकरी बचाने के लिए जैसा विविद कहता था, वैसा ही करते थे। उनके पकड़े जाने पर परिवार के कई लोग थाने पहुंचे और उन्हें बेकसूर बताया।