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जातिगत जनगणना में आंकड़ों का गड़बड़झाला

Sat, 13 Jul 2013 12:40 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Sat, 13 Jul 2013 12:40 AM IST
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fraud in caste census data

देरी के कारण पहले से ही विवादों में घिरी जातिगत जनगणना आंकड़ों की विश्वसनीयता के मामले में नया बखेड़ा खड़ा कर सकती है।

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कारण, राजधानी दिल्ली ने इस जनगणना में लोगों की वास्तविक संख्या से भी ज्यादा लोगों के आंकड़े जमा कर लिए हैं। मसलन यहां जातिगत जनगणना का आंकड़ा सौ फीसदी को भी पार कर गया है।

इसके अलावा दो साल से भी अधिक समय के बाद भी निकट भविष्य में जनगणना का काम पूरा होता नहीं दिख रहा है।

देश के 28 राज्यों और सात केन्द्र शासित प्रदेशों में से 20 में अब भी जातिगत जनगणना का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। जबकि इस योजना के मद में जारी की गई लगभग 98 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है।
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इसके अलावा कार्य पूरा होने के संदर्भ में राज्यों और केंद्र सरकार के दावे अलग-अलग हैं। इस कारण इस साल के अंत तक भी जातिगत जनगणना का काम पूरा होता नहीं दिख रहा।
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सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में आंकड़ों का गड़बड़झाला सामने आया है। दी गई सूचना के अनुसार जनगणना का कार्य पूरा करने वाले 15 राज्यों में राजधानी दिल्ली भी शामिल है।

मगर दिलचस्प तथ्य यह है कि इस राज्य में जनगणना का आंकड़ा सौ फीसदी को भी पार कर गया है। यहां 100.02 फीसदी लोगों के आंकड़े जमा किए गए हैं। अब यह .02 फीसदी अधिक लोग कहां से आए, इस पर कोई जवाब देने वाला नहीं है।

वैसे भी जनगणना कार्य के लिए दिल्ली में 33,167 ब्लॉक्स बनाए गए थे, मगर कार्य 33,174 ब्लॉक्स में हुआ। अब सात अतिरिक्त ब्लॉक्स कहां से आ गए, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि राजधानी में इलेक्ट्रानिक गणना के लिए तैयार किए गए टैबलेट का इस्तेमाल ही नहीं किया गया।

इसके अलावा चूंकि आवास एवं गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण विकास मंत्रालय इस कार्य के लिए एनजीओ और छोटी कंपनियों का सहारा ले रही है, इसलिए भी अभी से इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

इसके अलावा बीते 29 जून 2011 से शुरू हुई यह योजना कब पूरी होगी, इस पर केंद्र और राज्य के दावे अलग-अलग हैं।

केंद्र का दावा है कि इस साल के अंत तक काम पूरा कर लिया जाएगा। जबकि उत्तर प्रदेश ने जवाब में कहा है कि वह इस वित्तीय वर्ष में कार्य पूरा करने का प्रयास करेगी।

केंद्र के दावे के अनुसार उत्तर प्रदेश में अब महज 1.23 फीसदी ही काम बचा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर उत्तर प्रदेश को महज 1.23 काम पूरा करने के लिए नौ महीने लगेंगे तो बिहार को कितना समय लगेगा जहां कि अभी 7.64 फीसदी काम बचा हुआ है।


इस योजना में देरी पर सवाल उठाने वालों का कहना है कि जब जनगणना का कार्य महज 21 दिनों में पूरा होता है तो जातिगत जनगणना के लिए इतना लंबा वक्त क्यों लग रहा है।

जबकि जातिगत जनगणना का बजट जनगणना से कई गुणा ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि इस मद में अब तक जारी 3543.29 करोड़ में से 3250 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

सौ फीसदी काम करने वाले राज्य
हरियाणा, दीव-दमन, लक्षद्वीप, नगालैंड, पुडुचेरी, दादर-नागर हवेली, चंडीगढ़, त्रिपुरा, कर्नाटक, अरुणाचल, सिक्किम, केरल, दिल्ली और महाराष्ट्र।

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