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ये कहानियां बताती हैं नाबालिग अपराधियों की क्रूरता

Thu, 24 Dec 2015 03:24 PM IST
Updated Thu, 24 Dec 2015 03:24 PM IST
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four stories of juveline criminals

वेस्ट यूपी में नाबालिग अपराधियों को कमतर समझना ही सबसे बड़ी भूल है। इन मासूम से चेहरों के पीछे कितनी क्रूरता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हत्या करना तक इनके बाएं हाथ का खेल बन गया है।

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वेस्ट यूपी के चर्चित प्रकरणों पर गौर करें तो बुधवार को दिल्ली की कोर्ट में नाबालिग अपराधियों द्वारा गोलियां बरसाने से एक बार फिर साफ हो जाता है कि जरायम के बड़े खिलाड़ियों को मात दे रहे इन नाबालिगों में थोड़ा नहीं बहुत सुधार की गुंजाइश है।
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सिपाही को पीट-पीटकर मार डाला था

किशोर संप्रेक्षण गृह मेरठ के 25 किशोरों को 11 दिसंबर 2014 को गाजियाबाद से पेशी के बाद मेरठ लाया जा रहा था। इन किशोरों ने गाजियाबाद से लेकर मेरठ तक के रास्ते में हूटिंग, आती-जाती महिलाओं पर अश्लील कमेंट्स और गालीगलौज करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
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इनकी सुरक्षा में मौजूद पुलिसकर्मियों ने इन्हें डांटा था तो उल्टा संप्रेक्षण गृह पहुंचने पर उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दे दी गई थी। दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा था कि पुलिसकर्मी इनके इरादे नहीं भांप पाए थे।

संप्रेक्षण गृह पहुंचने पर गाड़ी से उतरते ही किशोरों ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया था। इस दौरान सिपाही ओमप्रकाश को पीट-पीटकर मार डाला गया था जबकि जानलेवा हमले में आरआई समेत 12 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

जलने से बचा था शहर

four stories of juveline criminals

11 सितंबर 2013 को घर से ट्यूशन के लिए निकले मोहल्ला सुभाष नगर निवासी 12 साल के करन कौशिक की हत्या कर शव कब्र में दफन कर दिया गया था। करन मथुरा के पुजारी राकेश कौशिक का इकलौता चिराग था।

हत्या नाबालिग आरोपी ताज मोहम्मद, शोएब और सरताज ने अंजाम दी थी। सांप्रदायिक तनाव की तपिश से शहर जलने से बचा था। राकेश इंसाफ के लिए लगातार लड़ रहे हैं। दो साल में वह आरोपियों को जिला जेल में भिजवा पाए हैं।

भरी अदालत में भून डाला था

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16 फरवरी 2015 को शामली जिले के गांव बहावड़ी निवासी सागर मलिक ने भरी अदालत में कुख्यात विक्की त्यागी को गोलियों से भून डाला था। सोची-समझी साजिश के तहत वह अदालत में वकील के वेश में फाइल में पिस्टल छिपाकर पहुंचा था।

इससे पहले सागर ने 11 जुलाई 2013 को भरी कचहरी में ही मुकदमे की तारीख पर आए बहावड़ी गांव के प्रधान पति देवेंद्र मलिक की हत्या कर सनसनी फैला दी थी।

उस समय उसके साथ उसका हमउम्र भाई नाबालिग अजय भी मौजूद था। फिलहाल वाराणसी की जेल में बंद सागर की उम्र को लेकर पेंच ही फंसा रहा।

जरायम की पाठशाला

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सूरजकुंड (मेरठ) स्थित किशोर संप्रेक्षण गृह को किशोरों ने सुधार गृह के बजाए जरायम की पाठशाला बना डाला। एक समय तो नोएडा और गाजियाबाद के किशोरों ने यहां ऐसा आतंक मचाया था कि आसपास रहने वाले लोग त्राहि-त्राहि कर चुके थे।

संप्रेक्षण गृह की छत पर चढ़कर आसपास रहने वाली महिलाओं पर कमेंट्स कसना, गालीगलौज करना, रात को तेज आवाज में डीजे बजाना उनका रोजाना का शगल था।

यही नहीं, ये नाबालिग संप्रेक्षण गृह से बाजार जाकर शराब और नशीले पदार्थ खरीदकर लाते थे। रोजाना पार्टी होती थी। अपने दोस्तों की कार की टेस्ट ड्राइव तक लेते थे।

थोड़ी सी सख्ती होने पर संप्रेक्षण गृह को सिलेंडर से उड़ाने तक की कोशिश कर डालते थे। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को अंजाम भुगतने की खुलेआम धमकी देते थे। इन्हें नाबालिग समझना ही बड़ी भूल ही थी कि संप्रेक्षण गृह ब्रेक कर एक साथ 92 किशोर फरार हो गए थे।

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