यूपी: देसी भी भरोसे लायक नहीं, 4 की मौत
यूपी के कौशाम्बी में जहरीली शराब से यूपी में कौशाम्बी के चार लोगों की मौत हो गई। रेलवे प्रोजेक्ट कानपुर (चकेरी) में मजदूरी करने वाले कौशाम्बी के बिदनपुर आमद करारी गांव के महेंद्र (30), अमरनाथ (52), श्रीपति (35), और विशेषर (42) ने चकेरी में ही मंगलवार की रात शराब पी थी। तबीयत बिगड़ने पर ये लोग घर चले आए थे। जहरीली शराब से चार मजदूरों की मौत से प्रशासन में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार की सुबह डीआईजी, डीएम, एसपी पहुंचे। जिलाधिकारी राजमणि यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि किसी विषाक्त तरल पदार्थ के सेवन से ही मौतें हुई है। प्रकरण की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।
कोखराज कोतवाली क्षेत्र के बिदनपुर आमद करारी गांव निवासी महेंद्र कुमार पुत्र बृजलाल, अमरनाथ पुत्र रघुराज, श्रीपति पुत्र गुलाब चंद्र, विशेषर पुत्र छंगूलाल समेत आठ लोग कानपुर के चकेरी में चल रहे रेलवे प्रोजेक्ट में मजदूरी करने के लिए 25 जनवरी की शाम को घर से गए थे। बताया जाता है कि मंगलवार की रात में इन सभी लोगों ने खाने के लिए गोश्त पकाया था। खाना खाने से पहले सभी ने शराब भी पी। इन मजदूरों के एक साथी शैलेंद्र ने बताया कि बुधवार की सुबह अचानक महेंद्र की हालत बिगड़ गई। उसे एक निजी अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
उसकी लाश लेकर अमरनाथ, श्रीपति और विशेषर एंबुलेंस से बुधवार की शाम घर आए। घर आते ही अमरनाथ, श्रीपति, विशेषर भी एक-एक करके बीमार होने लगे। इन्हें जिला चिकित्सालय लाया गया। जहां डॉक्टरों ने सभी की हालत नाजुक देख एसआरएन अस्पताल इलाहाबाद रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही सभी की सांसें थम गईं।
बृहस्पतिवार की सुबह जैसे ही जहरीली शराब पीने से बिदनपुर गांव के चार मजदूरों की मौत की खबर लगी, जिलेभर में हड़कंप मच गया। अफसरों के होश उड़ गए। मौके पर डीआईजी भगवान स्वरूप, डीएम राजमणि यादव, एसपी रतनकांत पांडेय, जिला आबकारी अधिकारी कई थानों की फोर्स और पीएसी के साथ गांव पहुंचे। अफसरों ने मामले की छानबीन की। मृतकों के परिजनों को मदद के साथ जांच करके कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
देसी शराब से कौशांबी के चार मजदूरों की मौत के बाद उठे सवाल
कच्ची शराब तो अक्सर मौत बनकर गरीबों पर टूटती ही है लेकिन अब तो देसी शराब भी भरोसे लायक नहीं रही। कौशांबी के जिन चार युवकों की जान गई, उन्होंने देसी शराब पी थी। इससे यह बात साबित होती है कि देसी शराब की बिक्री के नाम पर भी बड़ा खेल हो रहा है। या तो नकली शराब पर यूपी के ब्रांड का लेबल लगाकर बेचा जा रहा है या असली शराब में ही कोई गड़बड़ी है। हालांकि आबकारी विभाग और पुलिस के अफसर यह मान रहे हैं कि मजदूरों ने शराब में थिनर जैसी कोई चीज मिलाई थी।
देसी शराब पीने के बाद मौत का यह संभवत: प्रदेश का पहला मामला है। देसी शराब सरकारी डिस्टलरियों में बनती हैं और इसे बेचा भी ठेका की दुकानों पर जाता है। नकली-असली की पहचान के लिए होलोग्राम भी लगाए जाते हैं लेकिन अब तो होलोग्राम भी नकली बनने लगे हैं। पिछले माह मऊआइमा पुलिस ने भी ठेके के बगल से दूसरे प्रदेश की 30 लाख रुपये से अधिक कीमत की देसी शराब बरामद की थी। इसे भी लेबल बदकर बेचा जाना था। पुलिस को नकली लेबल और होलोग्राम भी मिले। ठेका निरस्त करने के साथ ही एक व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई। इसके बाद भी दूसरे राज्यों से शराब लाकर बेचने का धंधा खत्म नहीं हुआ।
फिर धधकने लगी भट्ठियां
लखनऊ में जहरीली शराब से मौतों के बाद इलाहाबाद पुलिस एवं आबकारी विभाग हरकत में आया और अभियान छेड़ा गया लेकिन समय बीतने के साथ ही यह भी ठंडा पड़ गया। आबकारी विभाग लाइसेंसों के नवीनीकरण और नई दुकानों के व्यवस्थापन में जुटा तो माफिया फिर से सक्रिय हो गए। शहर में पीपल गांव, झलवा, नीवा, चिल्ला, घूरपुर, महेवा पट्टी, नैनी, करछना समेत बड़े इलाकों में फिर से कच्ची शराब की भट्ठियां धधकने लगी हैं।
कौशाम्बी में भी गांव-गांव धधकती हैं भट्ठियां
जिस जहरीली शराब ने कौशाम्बी के चार मजदूरों की जान ले ली। वैसी ही जहरीली शराब को बनाने का कारोबार कौशाम्बी में भी बड़े पैमाने पर होता है। इसकी बानगी मलिहाबाद कांड के बाद चले अभियान के दौरान देखने को मिली थी। 15 दिनों तक पुलिस, आबकारी और राजस्व अफसरों की टीम ने गांव-गांव शराब बनाने वाले धंधेबाजों की धरपकड़ के लिए जिले में अभियान चलाया था। पुलिस आंकड़ों पर ही गौर करें तो तब पुलिस ने 600 घरों में दबिश दी थी। जहां शराब बनते हुए मिली थी। मौके से पुलिस ने 1200 लीटर महुआ की शराब, 100 लीटर स्प्रिट, 300 कुंतल लहन बरामद करते हुए 50 से अधिक शराब की भट्ठियां नष्ट की थी। इतना ही नहीं पुलिस ने 150 धंधेबाजों को गिरफ्तार करके जेल भी भेजा था। साथ ही अफसरों की टीम ने अभियान के दौरान अजुहा, केवटपुरवा, लोधन का पुरवा और नंदा का पुरवा गांव को देशी जहरीली शराब बनाने के मामले में अतिसंवेदनशील और खरका, तिलगोड़ी, चायल, लहना, फैजीपुर, ओसा, गढ़वा समेत दो दर्जन गांवों को संवेदशील भी चिन्हित किया है।
इन गांवों में धधक रहीं शराब की भट्ठियां
कोखराज कोतवाली क्षेत्र के जिस बिदनपुर गांव के चार मजदूर जहरीली शराब पीकर दुनिया से असमय विदा हो गए। उस बिदनपुर में भी अवैध तरीके से शराब बनाई जाती है। इसके अलावा कोखराज इलाके के ही देवभिटा, मोहनपुर, बिसारा, रामपुरवा, भदवां, बालकमऊ, खारा, सांई का पुरवा, टीकरडीह, करेंटी, मलाक भयाल, चाकवन, राला, बाजापुर, महेशपुर, कसिया, बम्हरौली, शहजादपुर, परसखी, काकराबाद, चकचमरूपुर और चमंधा गांवों में भी कच्ची शराब की भट्ठियां रोजाना धधकती रहती हैं। पुलिस ने कई बार इन गांवों में दबिश देकर शराब के साथ कारोबारियों की धरपकड़ और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की। इसके बाद भी इलाके और कौशाम्बी जिले में यह काला कारोबार बंद नहीं हो सका है।
ऐसे तैयार होती है जहरीली शराब
कच्ची शराब बनाकर बेचने वाले कारोबारी पियक्कड़ों की सेहत दांव पर लगाने में तनिक भी परहेज नहीं करते हैं। कम कीमत पर ज्यादा नशा देने के लिए महुआ के साथ स्प्रिट, थिनर, यूरिया, आक्सीटोसिन इंजेक्शन, नींद की गोली समेत तमाम तरह के अन्य रसायन भी मिलाकर शराब तैयार करते हैं। नशे के चक्कर में शराब पीने वाले लोगों की कभी-कभार मौत भी हो जाती है अथवा वे कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
कौशाम्बी में बनने और बिकने वाली देशी दारू अब तक कई लोगों की जान ले चुकी है। आठ अगस्त 2012 को ही कोखराज कोतवाली क्षेत्र के करेंहटी गांव के रोशनलाल और भुइयादीन की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है। वहीं वर्ष 2007 में कोखराज कोतवाली क्षेत्र मलाक भयाल गांव में भी शराब पीने से एक युवक की जान चली गई थी। अक्सर होने वाली इन जानलेवा घटनाओं के बाद भी जिले में इस काले कारोबार को पुलिस और आबकारी विभाग बंद नहीं करा पा रहा है।
मांस-मदिरा के शौक ने ले ली जान
कोखराज कोतवाली के बिदनपुर आमद करारी गांव के अमरनाथ, श्रीपति, महेंद्र कुमार और विशेषर मांस-मदिरा के शौकीन थे। इनके साथी मजदूर ही बताते हैं कि आए दिन ये गोश्त खाते और इस दौरान एक साथ बैठकर दारू भी पीते थे। पर, इससे पहले कभी इन मजदूरों की शराब पीने से तबीयत नहीं बिगड़ी थी।