भारत-श्रीलंका के बीच चार करार, चीन को संदेश
भारत ने श्रीलंका के साथ शुक्रवार को चार अहम करार किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रीलंका दौरे के मौके पर ये समझौते हुए। मोदी 28 साल बाद श्रीलंका के दौरे पर पहुंचने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले राजीव गांधी ने 1987 में इस पड़ोसी देश का दौरा किया था।
मोदी के इस दौरे को हिंद महासागर में चीन के खिलाफ भारत की सामरिक हित साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मोदी सेशेल्स और मॉरीशस का दौरा करके श्रीलंका पहुंचे हैं। मोदी ने इस मौके पर श्रीलंका के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई उपायों की भी घोषणा की।
मोदी ने सिरिसेना को हर तरह की मदद का भरोसा दिया। इससे पहले उन्होंने श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना से मुलाकात कर द्विपक्षीय और क्षेत्रीय महत्व के मसलों पर चर्चा की।
चीन के खिलाफ भारत के सामरिक हित साधने की कोशिश
सिरिसेना के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में मोदी ने कहा कि वह दौरे के महत्व को समझते हैं। 1987 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ओर से किया गया यह पहला दौरा है। दोनों देशों के बीच वीजा, कस्टम, युवा विकास और श्रीलंका में रबींद्रनाथ टैगोर मेमोरियल बनाने से जुडे़ करार हुए।
मोदी ने कहा कि इस करार से दोनों देशों के बीच कारोबार को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कारोबार से जुड़ी श्रीलंका की चिंताओं को दूर करने का भी भरोसा दिया।
31.8 करोड़ डॉलर की मदद
भारत ने त्रिनकोमाली में पेट्रोलियम हब बनाने के लिए श्रीलंका को पूरी मदद का भरोसा भी दिया है। श्रीलंका में रेलवे के विकास के लिए भारत ने नए सिरे से 31.8 करोड़ डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की। इसका इस्तेमाल मौजूदा रेलवे ट्रक को उन्नत करने में किया जाएगा।
केंद्रीय बैंक समझौते पर सहमत
ये हुए करार
वीजा, कस्टम, युवा विकास और श्रीलंका में रबींद्रनाथ टैगोर मेमोरियल बनाना।
श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ मेरी मुलाकात काफी बेहतर रही। इससे भविष्य में हमारे रिश्तों के और बेहतर होने की उम्मीद और भरोसा मिला है।
नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री