ये हैं नीरा यादव और इनके दामन पर लगे दाग

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 21 Nov 2012 07:55 AM IST
former up chief secretary neera yadav gets jail for noida land scam
यूपी की मुख्य सचिव, आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष, स्टेट रेवेन्यू बोर्ड नोएडा अथॉरिटी की चेयरमैन जैसे अहम पदों पर रह चुकी नीरा यादव रिटायरमेंट के बाद सियासत का सपना भी देखा करती थी। पति महेंद्र यादव आईपीएस थे और पुलिस सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद राजनीति में चमक रहे थे।

विधायक बनने के बाद भाजपा-बसपा गठबंधन सरकार में वह राज्य के माध्यमिक शिक्षा मंत्री बने थे। देखा-देखी नीरा भी सियासी ट्रैक पर दौड़ लगाने की तैयारी में लगी थी मगर घपले-घोटालों में उसकी गर्दन ऐसी फंसी कि राजनीति का ख्वाब सिर्फ ख्वाब ही बनकर रह गया।

नीरा को पिछले साल फ्लैक्स जमीन घोटाले में सजा हुई थी और उसे जेल जाना पड़ा था। हाईकोर्ट से जमानत मिली तो अब नोएडा प्लाट आवंटन मामले में भी वह कानूनी कसौटी पर मुजरिम साबित हो गई है।

नीरा के नाम बदनामियों के और भी कई दाग हैं। मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में प्रदेश की मुख्य सचिव रह चुकी नीरा देश की पहली ऐसी आईएएस अफसर रही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में भ्रष्टाचार के आरोपों चलते चीफ सेक्रेटरी पद से हटाया था।

1997 के आईएएस एसोसिएशन के चुनाव में नीरा को सबसे भ्रष्ट आईएएस अफसर भी माना गया था। बावजूद नीरा के रसूख में कोई कमी नहीं आई और एक से एक अच्छी पोस्टिंग मिलती रही।

उसके पिता सागर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर थे। तीन बहनों में सबसे बड़ी नीरा ने शुरूआती पढ़ाई यहां के सरस्वती शिशु मंदिर में की। इसके बाद परिवार जहां भी रहा, नीरा वहीं पढ़ी। नीरा के रिश्ते के भाई राजस्थान कैडर के आईएएस रहे हैं। उनकी ससुराल में एक पीसीएस अफसर भी हैं, जिनकी पोस्टिंग भी गाजियाबाद में रह चुकी है।

पिछले लोकसभा चुनाव में नीरा भाजपा में शामिल हुई थी। सियासी सूत्र बताते हैं कि त्यागी परिवार में जन्मी नीरा की निगाह उस समय त्यागी बहुल मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र पर थी।

नीरा ने मुरादनगर क्षेत्र में अपनी सक्रियता भी बढ़ाई थी। वक्त ने इसके बाद ऐसा पलटा खाया कि पिछले साल नीरा को नोएडा जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत चार साल की सजा सुना दी गई। नीरा को जेल जाना पड़ा। बाद में हाईकोर्ट से जमानत तो मिल गई मगर नीरा के सियासी करियर पर वहीं ब्रेक लग गया।

ये हैं नीरा के दामन पर लगे दाग
1. देश की पहली महिला आईएएस, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में भ्रष्टाचार केआरोपों में यूपी के मुख्य सचिव पद से हटाया था
2. 1997 में आईएएस एसोसिएशन के चुनाव में नीरा यादव को राज्य की सबसे भ्रष्ट अधिकारी होने का ‘खिताब’ दिया गया
3. 194 में नीरा नोएडा अथॉरिटी की चेयरमैन थी, तो नीरा ने नियमों को ताक पर रखकर बांट डाली थी हजारों एकड़ जमीन
4. नौकरशाहों, उद्योगपतियों और अपने करीबी लोगों को गलत तरीके से प्लाट आवंटित करने में फंस गई नीरा यादव की गर्दन
5. दिसंबर 2010 को सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद ने सुनाई थी नीरा और फ्लैक्स के मालिक अशोक  को 4-4 साल की सजा
6. नोएडा प्लाट आवंट घोटाले में अब कोर्ट ने नीरा यादव और पूर्व मंडलायुक्त राजीव कुमार को दिया है 3-3 साल कारावास

कौन है नीरा यादव
1. 1971 बैच की आईएएस नीरा यादव यूपी की मुख्य सचिव के अलावा यूपी आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष रह चुकी है।
2. यूपी में आईएएस अफसरों ने 1997 में अपने बीच मतदान के जरिए तीन अधिकतम भ्रष्ट अफसरों को चुना था, उसमें अखंड प्रताप सिंह, बृजेंद्र यादव के अलावा नीरा यादव भी थीं। तमाम आरोपों के बावजूद नीरा यादव  मुख्य सचिव बना दी गईं। अदालत के आदेश पर नीरा को शासकीय हेड की कुर्सी छोड़नी पड़ी।
3. नीरा यादव ने प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष पद पर रहते हुए रिटायरमेंट से दो महीने पहले ही आईएएस सेवा से इस्तीफा दिया।
4. वह पूर्व आईपीएस व राजनीतिज्ञ महेंद्र यादव की पत्नी हैं। जब महेंद्र यादव भाजपा सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री थे, तब नीरा यादव उसी विभाग में प्रमुख सचिव थीं। महेंद्र यादव ने इस साल जद यू से विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए।
 
कौन है राजीव कुमार
-1983 बैच के आईएएस अफसर राजीव कुमार द्वितीय वर्तमान में प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग थे। कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।
-सपा सरकार बनने से पहले वे राजस्व परिषद में थे। अखिलेश सरकार ने आते ही उन्हें अहम पोस्टिंग देते हुए नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया। हालांकि नोएडा प्लॉट आवंटन मामले में नीरा यादव के साथ आरोपी थे।
-दागी छवि वाले राजीव कुमार अहम पोस्टिंग के पीछे उनकी नीरा यादव से नजदीकी को माना जा रहा है।
-नीरा यादव जब नोएडा की चेयरपर्सन थीं, तब राजीव कुमार उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे।
 
...और ये अधिकारी कर रहे हैं बचने की कोशिश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा होटल प्लॉट आवंटन मामले में कड़ा रुख दिखाते हुए दो अन्य आईएएस अफसरों राकेश बहादुर व संजीव सरन को नोएडा में उनकी वर्तमान तैनाती से हटाने का आदेश दिया, तो दोनों अफसरों ने इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। अब इस पर अदालत को फैसला करना है।

वहीं छेड़खानी के आरोपी आईएएस शशि भूषण लाल भी निलंबित चल रहे हैं। उनको विभाग ने आरोप पत्र थमा दिया है। अब तक लगभग एक दर्जन आईएएस अफसर सीबीआई, आईडी व अन्य जांच एजेसिंयों के दायरे में हैं।

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