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लियाकत शाह की जमानत बनी केंद्र के गले की फांस

Sun, 26 May 2013 12:44 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
नई दिल्ली/गुंजन कुमार Updated Sun, 26 May 2013 12:44 AM IST
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former terrorist liaquat ali bail trouble for centre

हिजबुल मुजाहिद्दीन के पूर्व आतंकी लियाकत शाह की गिरफ्तारी जहां दिल्ली पुलिस के लिए मुसीबत बनी हुई है वहीं उसे मिली जमानत केंद्र सरकार के गले की फांस बन गई है।

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केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार की योजना के तहत आत्मसमर्पण करने जा रहे लियाकत की गिरफ्तारी की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आगे की तहकीकात धीमी कर रखी है।
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केंद्र को अंदेशा है कि अगर एनआईए दिल्ली पुलिस द्वारा लियाकत की गिरफ्तारी को खुले तौर पर गलत बताती है तो घाटी में मौजूद कट्टरपंथी और अलगाववादी तत्वों के साथ राजनीतिक दल भी इसका सियासी फायदा उठाएंगे।
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उच्चस्तरीय सरकार सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि गृहमंत्रालय इस मुद्दे को बड़ी बारीकी से भांप रहा है। सरकार के रणनीतिकारों ने एनआईए को इशारा कर दिया है कि लियाकत की गिरफ्तारी की जांच के खुलासे से घाटी के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

अंदेशा है कि घाटी में मौजूद केंद्र विरोधी धड़ा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोगों में जाकर देश का नाम खराब करेंगे। इतना ही नहीं वह कश्मीरियों के इंसाफ के नाम पर अदालत के जरिए भी केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि इसकी जांच धीमा रखने का फैसला किया गया है।

एनआईए के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक लियाकत को अदालत से जमानत मिल जाने का सीधा मतलब है कि दिल्ली पुलिस की लियाकत की गिरफ्तारी और उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं।

अब तक की जांच में एनआईए को ऐसे कोई सुराग नहीं मिले जिससे यह शक हो कि लियाकत की योजना होली के आसपास दिल्ली में आतंकी वारदात करने की थी।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने अपने परिवार के साथ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से नेपाल के रास्ते जम्मू-कश्मीर जा रहे लियाकत को भारत-नेपाल सीमा पर गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस का दावा था कि उसकी योजना दिल्ली में आतंकी वारदात करने की थी। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस ने लियाकत की निशानदेही पर पुरानी दिल्ली के गेस्ट हाउस से एके 56 रायफल और हैंड ग्रेनेड जैसे खतरनाक हथियार भी बरामद कर लिए थे।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दिल्ली पुलिस की इस हरकत पर सवाल खड़े किए। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि लियाकत आतंकवाद छोड़ आतंकियों को घाटी में बसाने की योजना के तहत आत्मसमर्पण करने आ रहा था।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी केंद्र पर सीधा आरोप मढ़ दिया। उमर ने कहा था कि अपने परिवार के साथ समर्पण करने जा रहा कोई भी आतंकवादी आतंकी वारदात कैसे कर सकता है।


दिल्ली पुलिस को सीधे आरोपों से बचाने के लिए केंद्र ने एनआईए को पूरे मामले के जांच की जिम्मेदारी दे दी थी। एनआईए अपनी जांच के क्रम में दिल्ली पुलिस की इन हरकतों को रिकार्ड पर लाती है तो इसके काफी दूरगामी परिणाम होंगे।

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