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पूर्व वायुसेना प्रमुख ने माना, रिश्तेदार के घर मिला था बिचौलिया
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 14 Feb 2013 12:13 AM IST
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वीवीआई हेलीकॉप्टर खरीद में नाम आने के बाद पूर्व वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी ने माना है कि वह इस सौदे के एक बिचौलिये से अपनी बुआ की बेटी के घर पर मिले थे। बिचौलिये का नाम कार्लो गैरोसा के रूप में सामने आया है। लेकिन उन्होंने खुद को मामले में पाक-साफ बताया है।
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उल्लेखनीय है कि मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही जा रही है कि इटली की कोर्ट में पेश प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि रक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनी फिनमैकानिका ने भारत सरकार से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों का सौदा कराने के लिए एसपी त्यागी को घूस दी थी। तब वह वायुसेना प्रमुख थे।
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त्यागी ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं अपनी रिश्तेदार के घर पर कार्लो से मिला था। लेकिन आप यह कहें कि
मैंने उससे संपर्क किया था तो मैं कहूंगा कि नहीं। मेरा उससे क्या संबंध हो सकता है? मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इस सौदे की पूरी प्रक्रिया मेरे सेवानिवृत्त होने के बाद शुरू हुई। हेलीकॉप्टर का मूल्यांकन, ट्रायल और अनुबंध सब 2010 में हुए।’ प्राप्त जानकारी के अनुसार रिटायरमेंट से पहले ने त्यागी अपनी बुआ की बेटी जूली के घर में दो बार गैरोसा से मुलाकात की थी।
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पूर्व वायुसेना प्रमुख ने उन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया कि उन्हें इस सौदे में किसी प्रकार की घूस प्राप्त हुई। उन्होंने कहा, ‘मैं निर्दोष हूं। सारे आरोप बेबुनियाद हैं। मैं इनका खंडन करता हूं। मैं 2007 में रिटायर हो गया था और यह सौदा 2010 में हुआ।’
उल्लेखनीय है कि त्यागी के तीन रिश्तेदारों -जूली, डॉकसा और संदीप त्यागी- के नाम इस सौदे की भूमिका में सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार और इटैलियन कंपनी के बीच यह सौदा करवाने में इन लोगों ने अहम भूमिका निभाई। पूर्व वायुसेना प्रमुख ने इस बात का भी खंडन किया कि रिश्तेदारों के साथ उनके किसी प्रकार के व्यावसायिक संबंध हैं।
यह पूछने पर पर कि क्या फिनमैकानिका को कॉन्ट्रेक्ट दिलाने के लिए उन्होंने किसी प्रकार की सौदा शर्तों को बदला, तो त्यागी ने कहा कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों के लिए खूबियां और जरूरतें 2003 में सुनिश्चित की जा चुकी थीं। जबकि मैंने पद संभाला ही नहीं था। मुझे नहीं लगता कि वायु सेना या उसका प्रमुख पहले से तय शर्तों को बदल सकते हैं।
आरोपों पर नहीं त्यागी के गांव वालों को विश्वास
बिजनौर। वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे में पूर्व एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी पर लगे आरोपों से उनका पैतृक गांव सकते में है। हालांकि पूर्व वायु सेनाध्यक्ष के जन्म के कुछ समय बाद ही उनका परिवार गांव से चला गया था, लेकिन गांव के लोग इस परिवार को अब भी अपना गौरव मानते हैं।
त्यागी के पैतृक गांव राजा का ताजपुर निवासियों के मुताबिक पूर्व वायुसेना अध्यक्ष का जन्म गांव में ही हुआ। उनके जन्म के कुछ वर्ष बाद ही उनके पिता सत्यपाल त्यागी परिवार समेत कोटा (राजस्थान) जाकर रहने लगे थे। गांववालों का कहना है कि यह प्रतिष्ठित व आदर्शवादी परिवार है।
पूर्व वायु सेनाध्यक्ष के दादा वेदपाल त्यागी राजस्थान के गवर्नर रहे थे। उनके एक भाई बंगलूरू व दूसरे भाई राजस्थान में है। परिवार के ही महेंद्र सिंह राजस्थान में जज है, जबकि उनके एक भाई का बंगलूरू में बड़ा कारोबार है।
पूर्व सेना प्रमुख त्यागी के समर्थन में आए
अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों की खरीद में घूस के विवाद के बीच कुछ पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एसपी त्यागी के समर्थन में सामने आए हैं। उनका कहना है कि रक्षा सौदों में वायुसेना प्रमुख की कोई भूमिका नहीं होती है।
पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल पीवी नाइक ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि वायुसेना क्षमताओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करती है। उससे जुड़े मूल्यांकन करती है। हम विभिन्न हवाई जहाजों की तकनीकी क्षमता और हमलावर गुणवत्ता को जांचते परखते हैं। व्यावसायिक मामलों में हमारी कोई भूमिका नहीं होती।’
वहीं पूर्व एयर चीफ मार्शल एस कृष्णास्वामी ने कहा कि जिन हेलीकॉप्टरों पर विवाद हो रहा है वे वीवीआईपी लोगों के लिए खरीदे गए थे न कि सुरक्षा के उद्देश्य से। उन्होंने दावा किया कि इन्हें खरीदने की पूरी प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय और स्पेशल प्रेटोक्शन ग्रुप की देखरेख में हुई।
उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा कि यह कोई रक्षा सौदा नहीं था। यह एक वीआईपी सौदा था। इसके लिए वीआईपी लोगों से जवाब तलब किया जाना चाहिए। वही इसके लिए जिम्मेदार हैं। वायुसेना इस मामले में सिर्फ तकनीकी पक्ष को देखने-परखने में शामिल थी।
उन्होंने कहा कि वीआईपी वायुयानों और हेलीकाप्टरों की खरीद वीआईपी लोग खुद ही देखते हैं। मेरे अनुसार इस हेलीकॉप्टर की खरीद प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां थीं। वर्ना इस तरह के आरोप सामने नहीं आते।