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भाजपा के गले में अटकीं महबूबा की कठिन शर्तें

Sun, 07 Feb 2016 05:36 AM IST
Updated Sun, 07 Feb 2016 05:36 AM IST
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formation of new governement in jammu and kashmir

जम्मू कश्मीर में नई सरकार के गठन में कई सियासी पेंच फंसे हैं। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती गठबंधन एजेंडे से अलग भी कुछ चाहती हैं जिसे मंजूर करना भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है। पीडीपी अब विश्वास बहाली के नाम पर उन शर्तों को आगे कर रही है जो कभी पीडीपी-कांग्रेस के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शुमार थे।

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वोट बैंक को साधने का पीडीपी का यह नुस्खा भाजपा के गले में अटक गया है। लिहाजा रियासत में अभी राज्यपाल शासन के बने रहने के आसार हैं। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद महबूबा को अपने जनाधार का किला ढहता नजर आ रहा है। अनंतनाग और बिजबिहेड़ा जैसे दुर्ग में अवाम भाजपा से गठबंधन के खिलाफ रही है।
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पीडीपी मानती है कि दस महीने के शासनकाल गठबंधन एजेंडे के तमाम बिन्दुओं पर कुछ काम नहीं हो पाया। इसलिए अब नए सिरे से कुछ हासिल करने की कोशिश हो रही है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती चाहती है कि वह अपने वोट बैंक को कुछ ठोस दिखा सके और उसके आधार पर नई सरकार के गठन के लिए तर्क पेश करना आसान हो जाए।
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गठबंधन का एजेंडा पहले से तय

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पीडीपी ने जब कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तब बिना ट्रायल लंबे समय से जेलों में बंद लोगों की रिहाई न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तीसरे बिन्दु के रूप में दर्ज था। भाजपा के साथ गठबंधन एजेंडे में इसे स्थान नहीं मिल पाया था। सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रदर्शनों में पत्थरबाजी के आरोप में गिरफ्तार लोगों की रिहाई, मानवाधिकार आयोग को मजबूत करने और अफस्पा को अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र से हटाए जाने जैसे मुद्दे अब फिर से पीडीपी के एजेंडे पर हैं। इसे गले से उतार पाना भाजपा के लिए मुश्किल है।

भाजपा के सूत्रों के मुताबिक पीडीपी शर्तें थोपकर मामले को उलझा रही है। गठबंधन एजेंडा पहले से तय है और उस पर कायम रहने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है लेकिन नई शर्तें कबूल करना संभव नहीं होगा। अफस्पा को आंशिक तौर पर कुछ क्षेत्रों से हटाए जाने का मुद्दा एजेंडे में है लेकिन इसका फैसला स्थिति के अध्ययन के बाद सेना को करना है।

एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों को जम्मू कश्मीर को वापस करने में कई तकनीकी दिक्कतें हैं। इसलिए इस पर जिद ठीक नहीं होगा। सेना और सुरक्षा बलों से अवैध कब्जे वाले भवनों और जमीन को खाली कराए जाने की प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी है। इसलिए सरकार गठन के लिए पीडीपी को जिद के बजाए लचीला रुख अपनाना होगा।

तसाद्दुक की ताजपोशी की तैयारी

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महबूबा पिता के पदचिह्नों पर चल रही हैं। लिहाजा सत्ता की भूख के आरोपों से बचने के लिए गठबंधन एजेंडे पर खींचतान अभी कुछ दिन और चल सकती है। गतिरोध खत्म करने में भाजपा की ओर से भी फिलहाल पहल नहीं हो रही है।

अमेरिका के फिल्म इंस्टीच्यूट से डिग्री लेकर लौटे फिल्म ओमकारा और कमीने के सिनेमाटोग्राफर और मुफ्ती मोहम्मद सईद के पुत्र तसाद्दुक मुफ्ती की ताजपोशी की पीडीपी में ताजपोशी की तैयारी चल रही है।

उन्हें महबूबा की संसदीय सीट अनंतनाग से चुनाव लड़ाया जा सकता है और पार्टी में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। महबूबा खुद मुफ्ती मोहम्मद की विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

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