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चुनौतियों पर खरे उतर पाएंगे विदेश सचिव?

Sat, 31 Jan 2015 12:01 PM IST
Updated Sat, 31 Jan 2015 12:01 PM IST
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Foreign Secretary will deal with these challenges?

अमेरिका और भारत की नई नजदीकियों से नाराज चीन और रूस से समीकरण दुरुस्त करने के लिए बनाए गए हाई प्रोफाइल विदेश सचिव एस जयशंकर के सामने कई कूटनीतिक चुनौतियां सामने खड़ी हैं।

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इन चुनौतियों से निपटने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह पूरी तरह नाकाम रही हैं। इनमें प्रमुख चुनौती है आतंकी संगठन आईएस (इस्लामिक स्टेट) के हाथों नौ महीने से बंधक पड़े 39 गरीब भारतीय जिनके बारे में सरकार के कुछ बयानों के अलावा किसी को कुछ नहीं मालूम।
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25 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साझा बयान के बाद सुजाता सिंह ने पूछे गए सवाल में कहा था कि सरकार इन बंधकों की सुरक्षित रिहाई की कोशिश में लगी है।
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चीन, रूस के साथ ही 39 बंधकों की भी चुनौती

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इससे पहले नवंबर में सुषमा ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया था कि इन बंधकों के मारे जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। वह सुरक्षित हैं और सरकार की कोशिश जारी है।

उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि इन बंधकों को आखिरी बार पिछले साल मई में मुसोल में देखा गया था, जब आईएस ने इराक के इन इलाकों पर अपने कब्जे का एलान किया था। अब इराक और पड़ोसी देशों के आईएस के कब्जे वाले इलाके में भारत का कूटनीतिक चैनल कितना मजबूत है इस पर संशय है।

आईएस की वजह से इराक में भारत के पुराने वह तंत्र भी काम नहीं आ रहे जो सद्दाम हुसैन के समय बनाए गए थे। ऐसे में खुफिया तंत्र को जयशंकर के लंबे तजुर्बे से उम्मीदें हैं। कम से कम जयशंकर इस नतीजे पर पहुंच जाएंगे कि इस सभी बंधकों की मौत हो चुकी है।

सुषमा की चीन यात्रा आज से, जयशंकर जाएंगे साथ

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नवनियुक्त विदेश सचिव एस जयशंकर के साथ शनिवार से चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगी। इस दौरान उनकी चीनी समकक्ष वांग यी से संबंधित मुद्दों पर बातचीत होगी। इसके अलावा वह रूस, भारत और चीन (आरआईसी) की विदेश मंत्री स्तर की बैठक में भी हिस्सा लेंगी।

विदेश मंत्री के दौरे में उनके साथ नए विदेश सचिव के अलावा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी साथ होंगे। दो दिन पहले विदेश सचिव बनाए गए जयशंकर का यह पहला विदेशी दौरा होगा। इससे पहले 2013 में अमेरिका के राजदूत बनने से पहले जयशंकर चीन में राजदूत के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चीनी विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगी। इस यात्रा से दोनों देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी साल हाने वाली चीन यात्रा की संभावना का भी पता लगाएंगे।

इससे पहले पिछले साल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग मोदी सरकार बनने के ठीक बाद भारत यात्रा पर आए थे। बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यात्रा अहम मानते हुए कहा है कि इससे विश्व के दो बड़े विकासशील देशों के द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती और स्थिरता आएगी।

नाकाबिल बताए जाने से खफा हैं सुजाता

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विदेश सचिव पद से अचानक हटाई गईं सुजाता सिंह ने शुक्रवार को न केवल अपनी चुप्पी तोड़ी बल्कि खुद को लेकर चल रहीं खबरों पर भी नाराजगी जताई। हटाए जाने की वजह नाकाबिल बताए जाने से बेहद खफा पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि उन्हें दूसरों की तरह अपनी उपलब्धियों का बखान करना नहीं आता है। साथ ही उन्होंने अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु करार में अपनी अहम भूमिका होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में उनके खिलाफ बेहद घटिया प्रचार कर बदनाम किया जा रहा है।

पूर्व विदेश सचिव सुजाता ने कहा कि वह अपनी बात साफ-साफ रखना चाहती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ सोचा समझा अभियान चलाया जा रहा है और उन्हें बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपने पूरे कैरियर के दौरान वह श्रेय लेने की जंग में नहीं कूदीं। बीते आठ महीनों के दौरान उन्होंने जिस तरह से विदेश नीति को संचालित किया, उसका उन्हें श्रेय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रेय लेने का खेल उन्होंने कभी नहीं खेला, वरना परमाणु करार मामले में उनकी अहम भूमिका रही।

परोक्ष रूप से नए विदेश सचिव जयशंकर पर हमला बोलते हुए सुजाता ने कहा कि उनकी दूसरों की तरह हमेशा मैं की जगह हम बोलने की आदत रही है। मेरी सबसे अहम खूबी बौद्धिक ईमानदारी और निष्ठा है, जोकि किसी भी तरह से बौद्धिक प्रतिभा से बेहतर है। उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर में उन्हें तीन या पांच साल के संवैधानिक पद का विकल्प देने का संकेत किया गया था मगर उन्होंने नकार दिया था।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने बुधवार देर रात अचानक सुजाता के कार्यकाल में 7 महीने की कटौती कर अमेरिका में भारत के राजदूत एस जयशंकर को नया विदेश सचिव नियुक्त कर दिया था। हटाए जाने की वजह सुजाता के अपने पद के अनुरूप दायित्वों को न निभाना बताया जा रहा था हालांकि पूर्व विदेश सचिव ने बृहस्पतिवार को कहा था कि उन्होंने खुद सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग की थी।

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