रेलवे की हालत सुधारने के लिए बना 'खास' प्लान
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वित्तीय बदहाली के कगार पर पहुंच चुकी भारतीय रेल को बचाने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु को आईएएस अधिकारियों और विदेशी कंपनियों की शरण लेनी पड़ी है। रेल मंत्री का पदभार संभालने के बाद सुरेश प्रभु ने रेलवे की वित्तीय हालत सुधारने का बीड़ा उठाया है।
पहले उन्होंने टेंडरिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मेट्रो मेन के नाम से विख्यात ई श्रीधरन की सेवाएं लीं। अब रेलवे की आमदनी कैसे बढ़ाई जाए, इसके लिए उन्होंने दो दिग्गज आईएएस अधिकारियों के अलावा दो विदेशी कंपनियों पर भरोसा जताते हुए एक नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी रेल मंत्री को 21 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें रेलवे को पटरी पर लाने के उपाय बताए जाएंगे।
रेल मंत्रालय देश में एक ऐसा एकमात्र संस्थान है जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की किसी स्तर पर भूमिका नहीं रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो यह पहली बार है जब रेलवे के आंतरिक मामलों में आईएएस अधिकारी की सेवाएं ली जा रही हैं। यह पहल खुद रेल मंत्री ने की है।
आईएएस अधिकारियों के हवाले रेलवे बोर्ड
आय के साधन ढूंढने के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी का चेयरमैन पूर्व बैंकिंग सचिव डीके मित्तल को बनाया गया है। इसके सदस्यों में एक अन्य आईएएस वित्त व मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव को भी शामिल किया गया है।
इसमें विदेशी सलाहकार कंपनियों बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप और मैकेंजी इंडिया को भी शामिल किया गया है। बाकी सदस्यों में रेल बोर्ड के वित्त आयुक्त, मंत्रालय की कंपनी राइट्स, इरकान और कांकर के अध्यक्षों के अलावा आरएलडीए के एमडी को भी सदस्य बनाया गया है।
यह कमेटी रेलवे की राजस्व संरचना का अध्ययन करेगी। राजस्व की हानि कहां से हो रही है इसका भी पता लगाया जाएगा, साथ ही आय और अतिरिक्त आय का जरिया कौन से साधन हो सकते हैं, इस बारे में भी बताया जाएगा।
ठीक नहीं रेलवे की आर्थिक सेहत
रेलवे के पास लंबित पड़ी दो लाख 58 हजार दो सौ 77 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसे नहीं है। यही कारण है कि रेल मंत्री रेलवे की आर्थिक हालत सुधारने के लिए लीक से हटकर काम करने जा रहे हैं।