फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Foreign Companies to Work on Indian Railways, Special Plan of Railway Minister Suresh Prabhu

रेलवे की हालत सुधारने के लिए बना 'खास' प्लान

Thu, 04 Dec 2014 12:42 PM IST
Updated Thu, 04 Dec 2014 12:42 PM IST
विज्ञापन
Foreign Companies to Work on Indian Railways, Special Plan of Railway Minister Suresh Prabhu

वित्तीय बदहाली के कगार पर पहुंच चुकी भारतीय रेल को बचाने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु को आईएएस अधिकारियों और विदेशी कंपनियों की शरण लेनी पड़ी है। रेल मंत्री का पदभार संभालने के बाद सुरेश प्रभु ने रेलवे की वित्तीय हालत सुधारने का बीड़ा उठाया है।

विज्ञापन


पहले उन्होंने टेंडरिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मेट्रो मेन के नाम से विख्यात ई श्रीधरन की सेवाएं लीं। अब रेलवे की आमदनी कैसे बढ़ाई जाए, इसके लिए उन्होंने दो दिग्गज आईएएस अधिकारियों के अलावा दो विदेशी कंपनियों पर भरोसा जताते हुए एक नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी रेल मंत्री को 21 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसमें रेलवे को पटरी पर लाने के उपाय बताए जाएंगे।
विज्ञापन


रेल मंत्रालय देश में एक ऐसा एकमात्र संस्थान है जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की किसी स्तर पर भूमिका नहीं रहती है। विशेषज्ञों की मानें तो यह पहली बार है जब रेलवे के आंतरिक मामलों में आईएएस अधिकारी की सेवाएं ली जा रही हैं। यह पहल खुद रेल मंत्री ने की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

आईएएस अधिकारियों के हवाले रेलवे बोर्ड

Foreign Companies to Work on Indian Railways, Special Plan of Railway Minister Suresh Prabhu

आय के साधन ढूंढने के लिए गठित उच्च स्तरीय कमेटी का चेयरमैन पूर्व बैंकिंग सचिव डीके मित्तल को बनाया गया है। इसके सदस्यों में एक अन्य आईएएस वित्त व मंत्रालय के आर्थिक मामलों के सचिव को भी शामिल किया गया है।

इसमें विदेशी सलाहकार कंपनियों बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप और मैकेंजी इंडिया को भी शामिल किया गया है। बाकी सदस्यों में रेल बोर्ड के वित्त आयुक्त, मंत्रालय की कंपनी राइट्स, इरकान और कांकर के अध्यक्षों के अलावा आरएलडीए के एमडी को भी सदस्य बनाया गया है।

यह कमेटी रेलवे की राजस्व संरचना का अध्ययन करेगी। राजस्व की हानि कहां से हो रही है इसका भी पता लगाया जाएगा, साथ ही आय और अतिरिक्त आय का जरिया कौन से साधन हो सकते हैं, इस बारे में भी बताया जाएगा।

ठीक नहीं रेलवे की आर्थिक सेहत
रेलवे के पास लंबित पड़ी दो लाख 58 हजार दो सौ 77 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसे नहीं है। यही कारण है कि रेल मंत्री रेलवे की आर्थिक हालत सुधारने के लिए लीक से हटकर काम करने जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed