गंगा की सफाई को तैयार अमेरिका
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गंगा निर्मलीकरण की चिंता सात समंदर पार तक पहुंच गई है। केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार गठित होने के बाद अमेरिका, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों की कंपनियों, संस्थाओं ने गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय को पत्र भेजकर गंगा निर्मलीकरण की दिशा में काम करने की इच्छा जताई है।
अमेरिका की साउथ डकोडा यूनिवर्सिटी ने तो यहां तक कहा है कि अगर उसे काम करने का अवसर मिला तो वह अपने खर्चे से गंगा में बहने वाले अवजल का शोधन करेगी।
यूनाइटेड किंगडम के ओवरसीज डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से अनुदानित गंगा एक्शन प्लान के प्रभावों पर हुए अध्ययन के मुताबिक गंगोत्री से गंगा सागर के बीच 52 महानगर और 48 नगर गंगा किनारे स्थित हैं।
इसके अलावा ग्रामीण बस्तियों की संख्या हजारों में है। इन शहरों और गांवों से प्रतिदिन 1.3 अरब लीटर अवजल सीधे गंगा में बहा दिया जाता है। इसके अलावा 26 करोड़ लीटर औद्योगिक कचरा, 60 लाख टन उर्वरक और 90 हजार टन कीटनाशक दवाओं से निकला अपशिष्ट रोजाना गंगा में बहाया जा रहा है।
गंगा में बहने वाले शहरी और औद्योगिक नालों के अलावा तटीय शहरों का सीवर सिस्टम फिलहाल मुसीबत का सबब बन गया है। शव भी प्रवाहित किए जा रहे हैं। ऐसे में गंगा का जल कई जगह आचमन के भी योग्य नहीं रह गया है।
अपने खर्चे पर काम करना चाहती हैं कंपनियां
गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती के करीबी और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के मुताबिक अमेरिका, स्विट्जरलैंड, जापान और इजराइल समेत कई देश गंगा निर्मलीकरण में हाथ बंटाने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका की साउथ डकोडा यूनिवर्सिटी केंद्र सरकार से एक पैसा लिए बिना सीवर का पानी शोधित करना चाहती है। इस विश्वविद्यालय में तैनात भारतीय मूल के प्रोफेसर राजेश सैनी ने अपने पत्र में कहा है कि विश्वविद्यालय बिना खर्च लिए काम करने के लिए तैयार हैं।
अमेरिका के टोरंटो में काम करने वाली जी इलेक्ट्रिकल्स ने भी इसके लिए प्रस्ताव भेजा है। स्विट्जरलैंड की कंपनी स्वेज डिग्रोमांट ने सिल्ट और काई सफाई की अपनी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल गंगा निर्मलीकरण में करने की इच्छा जताई है। इनके अलावा इजराइल, जापान, कनाडा और फ्रांस की संस्थाओं ने भी गंगा निर्मलीकरण में योगदान की पेशकश की है।
अमेरिका, स्विट्जरलैंड समेत दुनिया के कई देश अपनी बेहतर तकनीक के जरिए गंगा निर्मलीकरण में योगदान देना चाहते हैं। अब तक राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की ओर से गठित कमेटियों की जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार गंगा को स्वच्छ रखने के लिए और शोध की जरूरत है। ऐसे में विदेशी तकनीक अगर कारगर और सक्षम रूप से सामने आती है, तो उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
-- स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, राष्ट्रीय महामंत्री, गंगा महासभा