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खुलासा: सेंक्चुरी से मारकर होटलों में परोसे जाते हैं 'विदेशी पक्षी'

Wed, 06 Jan 2016 01:39 PM IST
Updated Wed, 06 Jan 2016 01:39 PM IST
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foreign birds killed in zoo and then eaten in big hotels

हस्तिनापुर सेंक्चुरी क्षेत्र भले ही शिकार के लिए प्रतिबंधित हो, लेकिन यहां विदेशी पक्षियों को धड़ल्ले से मारा जा रहा है। ये प्रवासी पक्षी प्रजनन के लिए सुरक्षित स्थान और मौसम की तलाश में यहां करीब पांच माह तक रहते हैं। लेकिन लगातार टारगेट पर रहने से साल दर साल इनकी संख्या घटती जा रही है।

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‘अमर उजाला’ ने इस शिकार को खुफिया कैमरे में कैद किया और शिकारियों से बात की, तो पूरा खेल सामने आ गया। सबसे अहम बात ये है कि शिकारी खुद बताते हैं कि इस गोरखधंधे में वन विभाग और स्थानीय पुलिस भी अपना हिस्सा लेती है।
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ऐसे हुआ शिकार का खुलासा

‘अमर उजाला’ ने खुफिया कैमरे के साथ हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में गंगा किनारे भ्रमण किया। इस दौरान कुछ युवकों की टीम गंगा किनारे टहलती मिली। उनके पास बंदूक आदि हथियार थे।
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खुफिया कैमरे से बेखबर इन लोगों ने गंगा किनारे विचरण कर रहे विदेशी पक्षियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। शिकारियों ने इस दौरान बंदूक की गोली और गुलेल से कई पक्षी मारे और उन्हें उठाकर इकट्ठा करते रहे।

बहुत महंगा है इन पक्षियों का मांस

foreign birds killed in zoo and then eaten in big hotels

एक शिकारी जावेद ने बताया कि उनकी टीम में करीब 15 सदस्य हैं, जो गुलेल, बंदूक आदि से शिकार करते हैं। जावेद के अनुसार, दिल्ली के नामचीन होटलों में इन पक्षियों का मांस परोसा जाता है। फोन पर उन्हें एक दिन पहले ऑर्डर मिल जाता है।

उसके अनुसार ही वह शिकार करते हैं। एक बार में करीब 200 पक्षियों का ऑर्डर मिलता है। एक पक्षी की कीमत 500 से 700 रुपये तक होती है। जबकि मुर्गा बाजार में सौ से डेढ़ सौ रुपये तक मिल जाता है।

वन विभाग और पुलिस की हिस्सेदारी

जावेद के अनुसार, वन विभाग और पुलिस सौ-सौ रुपये प्रति पक्षी अपना हिस्सा लेते हैं। वैसे तो पक्षी नवंबर से मार्च माह के बीच यहां मौजूद रहते हैं। लेकिन इनकी सबसे ज्यादा संख्या दिसंबर से फरवरी तक होती है। ऐसे में दो-ढाई माह ही उनकी कमाई होती है, जिसमें साल भर का खर्च निकाल लेते हैं।

यहां से आते हैं ये पक्षी

foreign birds killed in zoo and then eaten in big hotels

हस्तिनापुर सेंक्चुरी क्षेत्र में साइबेरिया, चीन, मंगोलिया, अफगानिस्तान, जापान आदि देशों से पक्षी प्रजनन के लिए आते हैं। गंगा किनारे का मौसम उनके अनुकूल होता है।

ये यहां बहुत बड़ी संख्या में होते हैं। साथ ही खादर में छोटी-बड़ी झील के किनारे भी प्रवास करते हैं। इन पक्षियों में सारस, काली चोंच का हंस, ह्यूब्लूज, पैकेड, स्पॉट, ब्रह्मी डक, लिटिल ग्रेट, कॉमन टील, लालकूट प्रमुख हैं।

प्रवासी पक्षी आने पर वन में पेट्रोलिंग वैसे भी बढ़ा दी जाती है। अगर तब भी शिकार हो रहा है, तो गश्त और बढ़ाई जाएगी। शिकारियों को पकड़कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मनीष मित्तल, डीएफओ

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