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इस्लाम विरोधी मुद्दों को हवा नहीं देगा संघ

Tue, 02 Jun 2015 05:36 PM IST
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 02 Jun 2015 05:36 PM IST
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for sangh beef is a unnecessary issue

भगवा परिवार इस्लाम विरोधी मुद्दों को सीधे हवा देने से परहेज करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद संघ और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात की सहमती बनी है कि वे संविधान की दायरे में रहकर ही हिंदुत्व के मुद्दों को उठाएंगे।

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दोनों के शीर्ष नेताओं ने यह तय किया है कि वे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएंगे जिससे इस्लाम को चोट पहुंचे। भड़काऊ बयानबाजी नहीं करना भी इसी योजना का हिस्सा है। हिंदुत्व की परिभाषा को संघ परिवार संवैधानिक ढांचे के अनुरूप मानता है। शायद यही वजह है कि संघ और सरकार का शीर्ष नेतृत्व गलतबयानियों को खारिज करता रहा है।
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पीएम मोदी ने खुद भाजपा के कुछ नेताओं की साम्प्रदायिक टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। मोदी ने कहा है कि किसी भी समुदाय के खिलाफ हिसा या भेदभाव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले संघ परिवार भी घरवापसी के मामले पर बड़बोले बोल बोलने वाले विहिप नेता राजेश्वर सिंह को पदमुक्त कर चुका है

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अनावश्यक है विवाद

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यही नहीं सत्ता आने के बाद से विहिप के फायर ब्रांड कहे जाने वाले नेता प्रविण तोगड़िया भी मौन धारण किए हुए हैं। विहिप ने बड़बोले बोल के लिए साध्वी प्राची के बयान की भी निंदा की थी।

विवादित मुद्दों पर संघ और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति का ही नतीजा है कि बीफ खाने को लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों के बीच छिडे़ जुबानी जंग को संघ ने अनावश्यक विवाद माना है।

इस विवाद को संघ बेवजह का मानता है। हालांकि गो हत्या के खिलाफ कानून की मांग पर वह अब भी कायम है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने अमर उजाला से बातचीत में कहा है कि बीफ खाने को लेकर पैदा हुआ विवाद अनावश्यक है।

जनता को जागरुक करना होगा

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उन्होंने कहा कि संघ गो हत्या के खिलाफ राष्ट्रीय कानून की मांग करता है। सरकार को प्रयास करके गौ हत्या के खिलाफ कानून बनाना चाहिए। गाय महज हिंदू धर्म या संस्कृति की ही पहचान नहीं है।

बल्कि इसका कृषि क्षेत्र में अहम योगदान है। यह वैज्ञानिकों ने भी माना है कि खेती के लिए देशी गाय का उपयोग सर्वोत्तम है। वैद्य ने कहा कि गो हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सिर्फ कानून बनाकर नहीं हो सकता है, बल्कि जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा।

पशुधन भी एक अमानत है। दूध न देने वाली गायों को बेचने के बजाय लोगों को उसके मल-मूत्र का खेती में उपयोग करना चाहिए। वैद्य ने कहा कि संघ के प्रचार-प्रसार के बाद देशभर में 800 से 900 गो शालाएं खुली हैं।

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